Indranil Bhattacharjee "सैल"

दुनियादारी से ज्यादा राबता कभी न था !
जज्बात के सहारे ये ज़िन्दगी कर ली तमाम !!

अपनी टिप्पणियां और सुझाव देना न भूलिएगा, एक रचनाकार के लिए ये बहुमूल्य हैं ...

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Oct 16, 2012

कैमरे के शूटिंग मोड्स




Basic shooting modes (बेसिक शूटिंग मोडस)

Auto Mode (ऑटो मोड): यह मोड नौसिखिओं के लिए होता है | इसमें हर बात कैमरा ही तय करता है | आपको कुछ भी नहीं करना है, बस कैमरा ओन कीजिये और बटन दबाइए |

Program Mode (प्रोग्राम मोड): कैमरा में इस मोड को “P” से जाना जाता है | यह लगभग ऑटो मोड की तरह ही होता है बस फर्क यह है कि इसमें आप ISO, फ्लश और White balance तय कर सकते हैं | अपरचर और शटर स्पीड कैमरा खुद तय करता है |
Macro mode (मैक्रो मोड): इस मोड में आप छोटी वस्तुओं का चित्र ले सकते हैं अथवा किसी चीज़ का पास से चित्र लेना हो तो इस मोड का इस्तमाल कर सकते हैं | यह एक तरह का “P” मोड ही है पर इससे पास कि वस्तुओं का चित्र बेहतर आता है | मसलन मान लीजिए कि आप किसी फूल या कीड़े की तस्वीर लेना चाहते हैं, तो आप इस मोड का इस्तमाल कीजिये | मैक्रो फोटोग्राफी के लिए मैक्रो लेन्स की ज़रूरत भी होती है | इस मोड में कैमरा खुद ही अपरचर बढ़ा कर DoF कम कर देता है ताकि छोटी वस्तुओं का चित्र साफ आये और बैकग्राउंड धुंधला जाय |
Sports mode (स्पोर्ट्स मोड): यह मोड साधारणतः खेल कूद के चित्र लेने के लिए इस्तमाल होता है क्यूंकि इससे आप तेज रफ़्तार वस्तु या लोगों की तस्वीर ले सकते हैं | इस मोड में कैमरा खुद ही ISO settings और शटर स्पीड बढ़ा देती है ताकि तेज रफ़्तार वस्तुओं की तस्वीर ली जा सके और धुंधलापन न हो |
Portrait mode (पोर्ट्रेट मोड): इस मोड में भी कैमरा खुद ही अपरचर बढ़ा कर DoF कम कर देता है ताकि आप लोगों के चेहरे का चित्र ले सकें और बैकग्राउंड धुंधला आये |
Landscape mode (लैंडस्केप मोड): इस मोड में कैमरा खुद ही अपरचर घटा कर DoF बढ़ा देता है ताकि आप प्राकृतिक दृश्य इत्यादि के चित्र ले सकें और बैकग्राउंड साफ़ आये |
Creative modes (क्रिएटिव मोड्स)

Shutter Priority Mode (शटर प्रायोरिटी मोड): Nikon के कैमरों में इसे “S” से और  Canon के कैमरों मे “Tv” चिन्ह से जाना जाता है | इसमें आप शटर स्पीड खुद तय करते हैं और कैमरा तय करता है कि अपरचर क्या होगा | P mode जैसे ही ISO, Flash और White Balance आप तय करते हैं | तेज रफ़्तार वस्तुओं का चित्र लेना हो तो इस मोड का इस्तमाल करना चाहिए |
Aperture Priority (अपरचर प्रायोरिटी मोड): Nikon के कैमरों में इसे “A” से और  Canon के कैमरों मे “Av” चिन्ह से जाना जाता है | इससे आप तस्वीर की Brightness तय करते हैं क्यूंकि अपरचर कम ज्यादा करने से अंदर आती रौशनी कम या ज्यादा होती है | पर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे DoF भी तय होता है | बड़ा अपरचर से कम DoF और छोटा अपरचर से ज्यादा DoF मिलता है | यानि कि यदि आपको बैकग्राउंड को धुंधला करना है तो आप कम DoF चाहेंगे | ऐसे में आपको बड़ा अपरचर चुनना है | दूसरी तरफ यदि आपको बैकग्राइंड को साफ़ रखना है तो आप ज्यादा DoF चाहेंगे | ऐसे में आपको छोटा अपरचर चुनना है | इसमें ISO, Flash और White Balance आप खुद तय कर सकते हैं |
Manual Mode (मनुअल मोड):  यदि आप सच में फोटोग्राफी सीखना चाहते हैं तो इस मोड पे तस्वीर लेना सीखिए | इसमें आप अपरचर और शटर दोनों को खुद कंट्रोल कर सकते हैं | इसके अलावा ISO, Flash और White Balance तो आप खुद तय कर ही रहे हैं |
इनके अलावा भी आधुनिक कैमरों में कुछ और मोड आ गए हैं जो पुराने कैमरों मे नहीं थे | चलिए अब हम इन पर अपनी दृष्टि डालें |
Panorama mode (पैनोरामा मोड): इस मोड में आप लगातार कुछ परस्परव्याप्त चित्र ले सकते हैं और कैमरा खुद उन चित्रों को जोड़कर एक बड़ा चित्र बना देगा जो ज्यादा इलाका कवर करता है |
HDR Backlight Control mode (एच डी आर बैकलाईट कंट्रोल मोड): इस मोड में कैमरा खुद ही तीन चित्र अलग अलग एक्स्पोज़र मे लेकर उन्हें आपस में मिलाके एक ऐसा चित्र बनाता है जिससे तस्वीर में छांव और चमकीले क्षेत्र दोनों साफ़ नज़र आये |
Night mode (नाईट मोड): इस मोड मे कैमरा खुद फ्लश ऑन रखता है | इससे रात के समय चित्र साफ़ आते हैं और बैकग्राउंड साफ़ दिखता है |
Handheld Night scene mode (हैण्डहेल्ड नाईट सीन मोड): इसमें रात के समय कैमरा खुद ३-४ फोटो लगातार ले लेता है और उन्हें आपस मे मिलाकर एक ऐसा फोटो प्रस्तुत करता है जिसमें noise (नाइज) कम हो |

Oct 8, 2012

फोटोग्राफी - शौक या पेशा ?

Canon Powershot SX30IS


फोटोग्राफी हमारे दुनिया देखने का तरीका बदल सकती हैं । रोज कि जिंदगी मे दिखते बेरौनक और बेहद मामूली चीज़ों को कैमरे के क्लिक से वो सौंदर्य मिल सकता है जिसे हम कभी सोचे भी नहीं थे । आज फोटोग्राफी महज एक पेशा भर नहीं है, बल्कि हर इंसान के लिए एक ऐसा मौका है जिससे वो अपनी यादों को संजो कर रख सकता है और खुद के सौंदर्य बोध को नए तरीके से दुनिया के सामने ला सकता है । फोटोग्राफी न केवल एक शौक है बल्कि आज के समाज मे एक बेहतरीन करियर के रूप मे उभर रहा है । यदि आपमें सौंदर्य बोध है और आप अच्छे से सीखना चाहते हैं, तो फोटोग्राफी को आप या तो एक शौक या करियर के रूप में चुन सकते हैं । ये आपको शोहरत, दौलत तो दिलाता ही है,  बल्कि इतिहास में जगह बनाने का मौका भी देता है । कई तस्वीरें ऐसी हैं, जो इतिहास के पन्नों पर अमर हो गई हैं । खास कर National Geographic Magazine के मुखपृष्ठ पर प्रकाशित “The Afghan girl” के बारे मे कौन नहीं जानता । 

पेशे के तौर पर देखा जाए तो फोटोग्राफी में कॅरियर बनाने के लिए आपको डिग्री व डिप्लेामा कोर्स की ज़रूरत होगी । फोटोग्राफी की ज़रूरत आज समाज की कई बातों मे होती है, जैसे कि पत्रकारिता, शादी-व्याह, फैशन, विज्ञापन, वन्य जीवन संरक्षण, पोर्ट्रेट, फोरेंसिक, फ्री लांसिंग, शिल्प इत्यादि । और तो और तस्वीरों को कई बार अदालत में सबूत के तौर पर भी इस्तमाल की गई है । आपके मोहल्ले के फोटोग्राफर के बारे में तो आप जानते ही होंगे, जिसके पास आप पासपोर्ट साइज़ फोटो खिंचवाने के लिए जाते हैं । भारत में सबसे ज्यादा तादाद शादी के फोटोग्राफरों का है क्यूंकि यह बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है ।

फोटोग्राफी का स्वरुप आज बदल चूका है । फिल्म कैमरे से फोटोग्राफी के दिन अब गुज़र चुके है । हाँ, पर कई फोटोग्राफर आज भी विशेष समय पर फिल्म कैमरा इस्तमाल करना पसंद करते हैं । 

डिजिटल कैमरे के फायदे ये हैं कि आप जितने चाहे तस्वीर ले लें । कोई फिल्म बर्बाद होने वाले तो नहीं है । एक ही चीज़ की १०० तस्वीर ले लो, और फिर उसमें से जो आपको अच्छा लगे, वो रखकर बाकी डिलीट कर दो । हालाँकि डिजिटल कैमरे के भाव फिल्म कैमरे से ज्यादा है । और फिर डिजिटल तस्वीरें देखने के लिए या उन्हें सँवारने के लिए आपको कंप्यूटर और विशेष सॉफ्टवेर की ज़रूरत होती है । पर आज के ज़माने में, शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहाँ कंप्यूटर न हो । और जहाँ तक तस्वीरें प्रोसेस करने की बात है तो कई सॉफ्टवेर तो मुफ्त में अंतरजाल पर उपलब्ध हैं । अब तो तस्वीरें कोई भारी भरकम एलबम में नहीं लपेटी जातीं हैं । आप जितनी चाहे तसवीरें खींचे और उन्हें अपने कंप्यूटर पर या DVD या Hard-disk में सेव कर लें । पहले आपके घर में कोई मेहमान आये तो उनको अपने शादी-व्याह या फिर यात्रा की तसवीरें दिखाने के लिए, अलमारी के सबसे ऊपर वाले रैक से कपड़ो के नीचे दबे मोटा एल्बम निकालना पड़ता था । आज किसी को अपनी तसवीरें दिखाना हो तो, कंप्यूटर के स्क्रीन पर आसानी से दिखाया जा सकता है, जो उन छोटे छोटे 4X6 के प्रिंट से कहीं बेहतर और बड़े दिखते हैं । और फिर किसी को तस्वीर देखने के लिए आपके घर आने की ज़रूरत भी तो नहीं है । भारत में बैठे ही आप अमेरिका में रहने वाले आपके दोस्त से अंतरजाल द्वारा फोटो शेअर कर सकते हैं । है न कमाल की बात ? 

और फिर आजकल तो हर मोबाईल फोन पर एक से बढ़कर एक बेहतरीन कैमरा आ रहा है । फिर कोई अगर यह कहता है कि तसवीरें लेना मुश्किल है तो फिर उसे क्या कहा जा सकता है ?
 
चलिए अब मैं आप सबसे खुद के शौक के बारे में बात करूँगा । कई सालों से मुझे फोटोग्राफी का शौक है । तबसे, जबसे डिजिटल कैमरे नहीं हुआ करते थे । तब फिल्म कैमरे हुआ करते थे । फोटोग्राफी उस वक्त बेहद महँगा शौक हुआ करता था । और आप ज्यादा तसवीरें ले भी नहीं सकते थे, क्यूंकि हर तस्वीर से एक एक्स्पोज़र चला जाता था । बहुत सोच समझ कर एक एक तस्वीर लेना होता था । आज के जैसा नहीं कि डिजिटल कैमरे से आप जितने चाहे तस्वीर ले लो, कोई फर्क नहीं पड़ता है । आज भी याद है, गुवाहाटी में मेरा फिल्म कैमरा चोरी जाने पर कितना दुःख हुआ था । 
खैर, जब डिजिटल फोटोग्राफी का चलन हुआ तो मैंने एक Olympus का कैमरा खरीदा था । छोटा सा डिजिटल कैमरा, जिसे आप आसानी से अपने पाकिट में रख कर बाहर घूम सकते हैं । जब चाहे निकालो, तस्वीर लो और फिर पाकिट के अंदर । फिर मैंने एक Canon का कैमरा खरीदा जो इतना छोटा तो नहीं था कि पाकिट के अंदर रखूं, पर “Point and Shoot” कैमरा होने के कारण इसे आसानी से साथ लिए घूम सकता था और जब चाहे तस्वीर खींच सकता था । 

खैर एक दिन यह भी आया जब मुझे यह लगने लगा कि शायद अब मैं इस कैमरा से संतुष्ट नहीं हूँ । मुझे किसी बेहतर कैमरे की तलाश थी । तब मैंने एक DSLR कैमरा खरीदा जिसे अब मैं इस्तमाल करता हूँ । इस कैमरे से जो तस्वीरें खींचता हू वो काफी सुन्दर और तकनिकी रूप से बेहतर होती हैं ।

आज इस पोस्ट के साथ मैं, मेरे द्वारा ली हुई कुछ तस्वीर यहाँ पर आप सबके लिए लगा रहा हूँ । उम्मीद है आप सबको ये तसवीरें पसंद आएगी । अगले पोस्ट में मैं यह बताऊंगा कि Camera कितने प्रकार के होते हैं और उसे कैसे इस्तमाल करना चाहिए । तब तक के लिए आज्ञा दीजिए ।


जिन मित्रों को मेरी ली हुई तस्वीर देखने हैं वो कृपया फेसबुक पर मेरा फोटोग्राफी पेज पर जाएँ या फिर मेरा Flickr account पर जाएँ !
 

Canon EOS 650D

Jul 8, 2012

क्या हिंदी एक निकृष्ट भाषा है ?


फेसबुक पर श्रीमान महफूज़ अली जी की एक बात पढकर मेरा मन सोचने पर विवश हो गया | महफूज़ ने लिखा है कि वो हवाई जहाज से यात्रा करते समय हिंदी ब्लॉग खोलने पर लोग उन्हें हिकारत की नज़र से देखने लगे | इससे उन्हें दुःख हुआ एवं वो इस बात पे सबकी दृष्टि आकर्षित करने के लिए फेसबुक पे इसका ज़िक्र किया | उनकी यह पोस्ट पढकर मैं भी यह सोचने लगा कि आखिर ऐसा क्यूँ है |
बहुत सोचने पर पाया कि जो भारतीय लोग हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओँ को निम्न कोटि के मानते हैं यह दरअसल उनकी गलती नहीं है | २०० साल अंग्रेजों की गुलामी के बाद यह स्वाभाविक है कि प्रभु की भाषा को प्राधान्य दी जाय और उसे ही श्रेष्ठ समझा जाय और खुद की भाषा को निकृष्ट | और फिर हिंदी के प्रचार प्रसार और उन्नति के लिए कोई काम हुआ भी तो नहीं है | जहाँ अंगरेजी में निरंतर उन्नति और बदलाव आते गए, वहीँ हिंदी एक ठहराव में फंसकर रह गई | आज ज़रूरी हो गया है कि हम भारतीय भाषाओँ में उन्नति लायें | और यह तभी संभव होगा जब हम
  1. अपनी भाषा पे गर्व करना सीखे – गुलाम मानसिकता से बाहर निकलना ज़रूरी है | अंग्रेज हमें यह सिखाकर गए हैं कि उनकी हर बात अच्छी और हमारी हर बात घटिया है | यह बात हमारे दिलो-दिमाग में रच-बस गई है | हमें इस बात को भूलना होगा | नए सीरे से अपनी भाषा से प्यार करना होगा | इस बात को समझना होगा कि जो लोग अपनी भाषा को भूलकर केवल अंगरेजी से प्यार करते हैं ... वो दरअसल आज भी मानसिक रूप से गुलाम हैं | देश में सच्ची आज़ादी तभी आ पायेगी जब हमें इन मानसिक बेड़ियों को तोड़ पाएंगे | अंगरेजी एक वैश्विक भाषा है | उसे सीखना गलत नहीं है ये यूँ कहे अंगरेजी कोई घटिया भाषा नहीं है | पर अंगरेजी सीखने का मतलब यह नहीं है कि हम अपनी भाषाओं को भूला दें |
  2. अपनी भाषा कि उन्नति के लिए कोशिश करें - यदि उसमे बदलाव कि ज़रूरत है तो वह बदलाव लाएं | तकनिकी क्षेत्र में हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं को प्रयोग करें और उसके लिए ज़रूरी शब्द बनाएँ | अंगरेजी भाषा केवल इसलिए वैश्विक भाषा नहीं बनी कि अंग्रेजों की भाषा है | बल्कि उसके पीछे कारण यह है कि अंगरेजी समय के साथ तेजी से बदलती गई और उन्नति करती गई | खासकर तकनिकी क्षेत्र में | वहीँ भारतीय भाषाओँ में केवल धर्म और प्रांतीयता से जुड़े रहने के कारण बदलाव नहीं आ पाया | आज हमें हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओँ को तकनिकी क्षेत्र में प्रयोग करने का समय आ गाय है | उसके लिए यदि ज़रूरी है तो उनमें तबदीली लायी जाय |
  3. भारतीय भाषाओँ का प्रचार प्रसार हो – सरकारी तौर पर भारतीय भाषाओँ का प्रचार प्रसार को अधिक महत्वा दिया जाय |
  4. भारतीय भाषाएँ, खासकर हिंदी में काम करने वालों को प्रोत्साहन दिया जाय – इसके लिए हर दफ्तर, हर महकमे में मुहीम चले |
  5. हिंदी समाचार पत्र, पुस्तक एवं अन्य दस्तावेजों में तबदीली लाइ जाय और उन्हें बेहतर बनाई जाय – प्रचार प्रसार में सबसे ज़रूरी बात होती है गुणवत्ता की |
इस बारे में आप अपने ख्याल से मुझे अवगत करवाइए | पाठकों से अनुरोध है कि वो केवल सहमति या असहमति न जताकर, अपने विचार टिपण्णी के स्वरुप में लिखें |

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