Indranil Bhattacharjee "सैल"

दुनियादारी से ज्यादा राबता कभी न था !
जज्बात के सहारे ये ज़िन्दगी कर ली तमाम !!

अपनी टिप्पणियां और सुझाव देना न भूलिएगा, एक रचनाकार के लिए ये बहुमूल्य हैं ...

May 1, 2010

ये ब्लॉग जगत है

कुछ स्वाद बदलने के लिए और कुछ इस ब्लॉग जगत के बारे में कहने के लिए लीजिये ये रचना प्रस्तुत है; उम्मीद है ठेठ ब्लॉगर भाई लोग बुरा नहीं मानेंगे:

किसने कहा जो लिखी है मैंने वो ग़ज़ल है ।
नया फैशन है सब कुछ चलता आजकल है  ॥


मैं भी लिखूं, तुम भी लिखो, कथा-हास्य-काव्य ।
है ये ब्लॉग जगत यहाँ हर कोई प्रबल है ॥


क्यूँ रोते हो, जो हो गया उच्च रक्त चाप ।
रात भर जाग ब्लॉग्गिंग का ही तो ये फल है ॥


यहाँ डायरी, समाचार, गद्य और कविता ।
दिलकश रंगीन बड़ा इस देवी का आँचल है ॥


ये अनन्त आदिगंत, कोई ना इस जैसा ।
यही सूर्य, यही चन्द्र, यही अस्ताचल है ॥


(इस पंक्ति की जगह ये भी लिखी जा सकती थी  “यही घोडा, यही गधा, यही अस्तबल है)


यही सत्य है जगत में, इसीका सहारा ।
बाकि मिथ्या माया है, सब रिश्ते नाते छल है ॥


हर कोई समान, नहीं इसमें भेद भाव ।
'सैल' तुमसा गरीब भी बनाता महल है ॥


चित्र साभार गूगल सर्च

35 comments:

  1. यही घोड़ा, यही गधा, यही अस्तबल है !!

    ReplyDelete
  2. hmmm...badhiya rachna... aap ki shanshodhanatmak tippani mili...aapne sahi kaha hai .zara si fer badal se vakya sanrachan bhi sahi hui ..aur pankti kilay par bhi prabhav nahi pada..shuqriya.. aap ki yah hazal numaan rachna achhi lagi..lay aur behtrar ho sakti thi ..aisa laga..

    ReplyDelete
  3. waah.........bilkul sahi kaha.

    ReplyDelete
  4. Yahi qissa har jagat ka hai..!

    ReplyDelete
  5. वाह, बढिया विचार और सुन्दर प्रस्तुति,मैं गर कह्ता तो शायद कुछ एसे:

    मेरे दिल जो आया लिख डाला,
    इसके माने निकाले और कोई,

    जो भी अच्छा लगेगा कह दूंगा,
    चाहे माने न माने और कोई।

    ReplyDelete
  6. स्वप्निल जी आपने सही कहा ... थोडा और ध्यान देता तो लय बेहतर हो सकती थी ... अचानक दिमाग में बात आ गयी और मैंने लिख दी ... खैर, सोच कर देखूंगा कि कैसे सुधर लाया जा सकता है !

    ReplyDelete
  7. बहुत खूब सैल जी,
    in lieu of वाली लाईन तो बहुत ही बढ़िया है।

    ReplyDelete
  8. वाह वाह क्या बात है! बहुत बढ़िया! बिल्कुल सही फ़रमाया है आपने!

    ReplyDelete
  9. बहुत बढ़िया

    ReplyDelete
  10. Aapki gajal kya kamal hai
    blogging ka likh diya poora hal hai .

    ReplyDelete
  11. alag hatker jo likha hai,wah tareefe kabil hai, swatantra vichaaron ka swagat sab karenge

    ReplyDelete
  12. yahin ghoda,yahin ghodi,yahin astbal hai.

    is se achchha ho hi nahin sakta hai. Ram Ram.

    ReplyDelete
  13. किसने कहा जो लिखी है मैंने वो ग़ज़ल है ।
    नया फैशन है सब कुछ चलता आजकल है ॥
    dekhiye kaisa laga.

    ReplyDelete
  14. वाह्!क्या बात है! मन आनन्दित हुआ.....

    ReplyDelete
  15. वाह , बहुत बढ़िया अवलोकन कर रचना गढ़ी है...सुन्दर ग़ज़ल...

    ReplyDelete
  16. हल्केफुल्के ढंग से भारी भरकम बात कह दी

    ReplyDelete
  17. सही बात कही सब एक ही अस्तबल में आ गये है
    अरे हम जैसे गधों के लिए भी एक अलग से अस्तबल तो होना माँगता है ना भाई
    है कि नहीं ///...


    यही घोड़ा यही गधा यही अस्तबल है

    सही है जी सही है

    ReplyDelete
  18. बेहतरीन!! घोड़ा गधा अस्तबल ही ठीक रहता..हा हा!!

    ReplyDelete
  19. वाह सुंदर भावाभिव्यक्ति साधुवाद

    ReplyDelete
  20. हास्य व्यंग्य की शानदार प्रस्तुति ! बधाई स्वीकारें !

    ReplyDelete
  21. प्रेम जी ! सुझाव के लिए शुक्रिया ... आपने सही लिखा है ... थोडा शब्द अदल बदल कर देने से बेहतर लग रहा है ... मैंने आपकी सुझाई हुई पंक्ति लगा दी है ...

    समीर लाल जी, शुक्रिया ! पहले तो घोडा गधा ही लगाने का सोचा ... पर फिर सोचा की ज्यादा गुस्ताखी शायद ठीक नहीं होगी ... इसलिए उस पंक्ति को "side hero" के तौर पर रख दिया !

    वीनस जी, गधों के लिए अलग से अस्तबल तो बनने से रहा, इसलिए गधे घोड़े एक ही अस्तबल में रहे तो बेहतर है ... हम जैसे गधे भी घोड़ों की भीड़ में शामिल होकर अपना काम चला लेते हैं, और किसीको पता भी नहीं चलता ...:)

    ReplyDelete
  22. ब्लागजगत के हाल का चित्र खींचा आपने
    सुमन कहे कि सैल जी बात कहने में सफल है

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

    ReplyDelete
  23. bahut khub


    badhai is ke liye aap ko

    ReplyDelete
  24. bahut khub...
    achhi rachna.....
    yun hi likhte rahein....
    regards
    http://i555.blogspot.com/

    ReplyDelete
  25. हैं तो इसका मतलब इस ब्लोग्गर बाबा का देसी नाम "अस्तबल" है जिसमें हम सब बंधे हुए बिलबिलाए और हिनहिनाए जा रहे हैं ,,,ओहोहो क्या सुरूर चढा है आज तो । छा गए गुरू छा गए

    ReplyDelete
  26. क्या कहने साहब
    जबाब नहीं
    प्रसंशनीय प्रस्तुति
    satguru-satykikhoj.blogspot.com

    ReplyDelete
  27. हल्के फुल्के तरीके से लिखी सशक्त बात ..... जो कहना चाहते हैं बाखूबी कह दिया है ...

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणियां एवं सुझाव बहुमूल्य हैं ...

आप को ये भी पसंद आएगा .....

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...