Indranil Bhattacharjee "सैल"

दुनियादारी से ज्यादा राबता कभी न था !
जज्बात के सहारे ये ज़िन्दगी कर ली तमाम !!

अपनी टिप्पणियां और सुझाव देना न भूलिएगा, एक रचनाकार के लिए ये बहुमूल्य हैं ...

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Oct 16, 2012

कैमरे के शूटिंग मोड्स




Basic shooting modes (बेसिक शूटिंग मोडस)

Auto Mode (ऑटो मोड): यह मोड नौसिखिओं के लिए होता है | इसमें हर बात कैमरा ही तय करता है | आपको कुछ भी नहीं करना है, बस कैमरा ओन कीजिये और बटन दबाइए |

Program Mode (प्रोग्राम मोड): कैमरा में इस मोड को “P” से जाना जाता है | यह लगभग ऑटो मोड की तरह ही होता है बस फर्क यह है कि इसमें आप ISO, फ्लश और White balance तय कर सकते हैं | अपरचर और शटर स्पीड कैमरा खुद तय करता है |
Macro mode (मैक्रो मोड): इस मोड में आप छोटी वस्तुओं का चित्र ले सकते हैं अथवा किसी चीज़ का पास से चित्र लेना हो तो इस मोड का इस्तमाल कर सकते हैं | यह एक तरह का “P” मोड ही है पर इससे पास कि वस्तुओं का चित्र बेहतर आता है | मसलन मान लीजिए कि आप किसी फूल या कीड़े की तस्वीर लेना चाहते हैं, तो आप इस मोड का इस्तमाल कीजिये | मैक्रो फोटोग्राफी के लिए मैक्रो लेन्स की ज़रूरत भी होती है | इस मोड में कैमरा खुद ही अपरचर बढ़ा कर DoF कम कर देता है ताकि छोटी वस्तुओं का चित्र साफ आये और बैकग्राउंड धुंधला जाय |
Sports mode (स्पोर्ट्स मोड): यह मोड साधारणतः खेल कूद के चित्र लेने के लिए इस्तमाल होता है क्यूंकि इससे आप तेज रफ़्तार वस्तु या लोगों की तस्वीर ले सकते हैं | इस मोड में कैमरा खुद ही ISO settings और शटर स्पीड बढ़ा देती है ताकि तेज रफ़्तार वस्तुओं की तस्वीर ली जा सके और धुंधलापन न हो |
Portrait mode (पोर्ट्रेट मोड): इस मोड में भी कैमरा खुद ही अपरचर बढ़ा कर DoF कम कर देता है ताकि आप लोगों के चेहरे का चित्र ले सकें और बैकग्राउंड धुंधला आये |
Landscape mode (लैंडस्केप मोड): इस मोड में कैमरा खुद ही अपरचर घटा कर DoF बढ़ा देता है ताकि आप प्राकृतिक दृश्य इत्यादि के चित्र ले सकें और बैकग्राउंड साफ़ आये |
Creative modes (क्रिएटिव मोड्स)

Shutter Priority Mode (शटर प्रायोरिटी मोड): Nikon के कैमरों में इसे “S” से और  Canon के कैमरों मे “Tv” चिन्ह से जाना जाता है | इसमें आप शटर स्पीड खुद तय करते हैं और कैमरा तय करता है कि अपरचर क्या होगा | P mode जैसे ही ISO, Flash और White Balance आप तय करते हैं | तेज रफ़्तार वस्तुओं का चित्र लेना हो तो इस मोड का इस्तमाल करना चाहिए |
Aperture Priority (अपरचर प्रायोरिटी मोड): Nikon के कैमरों में इसे “A” से और  Canon के कैमरों मे “Av” चिन्ह से जाना जाता है | इससे आप तस्वीर की Brightness तय करते हैं क्यूंकि अपरचर कम ज्यादा करने से अंदर आती रौशनी कम या ज्यादा होती है | पर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे DoF भी तय होता है | बड़ा अपरचर से कम DoF और छोटा अपरचर से ज्यादा DoF मिलता है | यानि कि यदि आपको बैकग्राउंड को धुंधला करना है तो आप कम DoF चाहेंगे | ऐसे में आपको बड़ा अपरचर चुनना है | दूसरी तरफ यदि आपको बैकग्राइंड को साफ़ रखना है तो आप ज्यादा DoF चाहेंगे | ऐसे में आपको छोटा अपरचर चुनना है | इसमें ISO, Flash और White Balance आप खुद तय कर सकते हैं |
Manual Mode (मनुअल मोड):  यदि आप सच में फोटोग्राफी सीखना चाहते हैं तो इस मोड पे तस्वीर लेना सीखिए | इसमें आप अपरचर और शटर दोनों को खुद कंट्रोल कर सकते हैं | इसके अलावा ISO, Flash और White Balance तो आप खुद तय कर ही रहे हैं |
इनके अलावा भी आधुनिक कैमरों में कुछ और मोड आ गए हैं जो पुराने कैमरों मे नहीं थे | चलिए अब हम इन पर अपनी दृष्टि डालें |
Panorama mode (पैनोरामा मोड): इस मोड में आप लगातार कुछ परस्परव्याप्त चित्र ले सकते हैं और कैमरा खुद उन चित्रों को जोड़कर एक बड़ा चित्र बना देगा जो ज्यादा इलाका कवर करता है |
HDR Backlight Control mode (एच डी आर बैकलाईट कंट्रोल मोड): इस मोड में कैमरा खुद ही तीन चित्र अलग अलग एक्स्पोज़र मे लेकर उन्हें आपस में मिलाके एक ऐसा चित्र बनाता है जिससे तस्वीर में छांव और चमकीले क्षेत्र दोनों साफ़ नज़र आये |
Night mode (नाईट मोड): इस मोड मे कैमरा खुद फ्लश ऑन रखता है | इससे रात के समय चित्र साफ़ आते हैं और बैकग्राउंड साफ़ दिखता है |
Handheld Night scene mode (हैण्डहेल्ड नाईट सीन मोड): इसमें रात के समय कैमरा खुद ३-४ फोटो लगातार ले लेता है और उन्हें आपस मे मिलाकर एक ऐसा फोटो प्रस्तुत करता है जिसमें noise (नाइज) कम हो |

Oct 8, 2012

फोटोग्राफी - शौक या पेशा ?

Canon Powershot SX30IS


फोटोग्राफी हमारे दुनिया देखने का तरीका बदल सकती हैं । रोज कि जिंदगी मे दिखते बेरौनक और बेहद मामूली चीज़ों को कैमरे के क्लिक से वो सौंदर्य मिल सकता है जिसे हम कभी सोचे भी नहीं थे । आज फोटोग्राफी महज एक पेशा भर नहीं है, बल्कि हर इंसान के लिए एक ऐसा मौका है जिससे वो अपनी यादों को संजो कर रख सकता है और खुद के सौंदर्य बोध को नए तरीके से दुनिया के सामने ला सकता है । फोटोग्राफी न केवल एक शौक है बल्कि आज के समाज मे एक बेहतरीन करियर के रूप मे उभर रहा है । यदि आपमें सौंदर्य बोध है और आप अच्छे से सीखना चाहते हैं, तो फोटोग्राफी को आप या तो एक शौक या करियर के रूप में चुन सकते हैं । ये आपको शोहरत, दौलत तो दिलाता ही है,  बल्कि इतिहास में जगह बनाने का मौका भी देता है । कई तस्वीरें ऐसी हैं, जो इतिहास के पन्नों पर अमर हो गई हैं । खास कर National Geographic Magazine के मुखपृष्ठ पर प्रकाशित “The Afghan girl” के बारे मे कौन नहीं जानता । 

पेशे के तौर पर देखा जाए तो फोटोग्राफी में कॅरियर बनाने के लिए आपको डिग्री व डिप्लेामा कोर्स की ज़रूरत होगी । फोटोग्राफी की ज़रूरत आज समाज की कई बातों मे होती है, जैसे कि पत्रकारिता, शादी-व्याह, फैशन, विज्ञापन, वन्य जीवन संरक्षण, पोर्ट्रेट, फोरेंसिक, फ्री लांसिंग, शिल्प इत्यादि । और तो और तस्वीरों को कई बार अदालत में सबूत के तौर पर भी इस्तमाल की गई है । आपके मोहल्ले के फोटोग्राफर के बारे में तो आप जानते ही होंगे, जिसके पास आप पासपोर्ट साइज़ फोटो खिंचवाने के लिए जाते हैं । भारत में सबसे ज्यादा तादाद शादी के फोटोग्राफरों का है क्यूंकि यह बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है ।

फोटोग्राफी का स्वरुप आज बदल चूका है । फिल्म कैमरे से फोटोग्राफी के दिन अब गुज़र चुके है । हाँ, पर कई फोटोग्राफर आज भी विशेष समय पर फिल्म कैमरा इस्तमाल करना पसंद करते हैं । 

डिजिटल कैमरे के फायदे ये हैं कि आप जितने चाहे तस्वीर ले लें । कोई फिल्म बर्बाद होने वाले तो नहीं है । एक ही चीज़ की १०० तस्वीर ले लो, और फिर उसमें से जो आपको अच्छा लगे, वो रखकर बाकी डिलीट कर दो । हालाँकि डिजिटल कैमरे के भाव फिल्म कैमरे से ज्यादा है । और फिर डिजिटल तस्वीरें देखने के लिए या उन्हें सँवारने के लिए आपको कंप्यूटर और विशेष सॉफ्टवेर की ज़रूरत होती है । पर आज के ज़माने में, शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहाँ कंप्यूटर न हो । और जहाँ तक तस्वीरें प्रोसेस करने की बात है तो कई सॉफ्टवेर तो मुफ्त में अंतरजाल पर उपलब्ध हैं । अब तो तस्वीरें कोई भारी भरकम एलबम में नहीं लपेटी जातीं हैं । आप जितनी चाहे तसवीरें खींचे और उन्हें अपने कंप्यूटर पर या DVD या Hard-disk में सेव कर लें । पहले आपके घर में कोई मेहमान आये तो उनको अपने शादी-व्याह या फिर यात्रा की तसवीरें दिखाने के लिए, अलमारी के सबसे ऊपर वाले रैक से कपड़ो के नीचे दबे मोटा एल्बम निकालना पड़ता था । आज किसी को अपनी तसवीरें दिखाना हो तो, कंप्यूटर के स्क्रीन पर आसानी से दिखाया जा सकता है, जो उन छोटे छोटे 4X6 के प्रिंट से कहीं बेहतर और बड़े दिखते हैं । और फिर किसी को तस्वीर देखने के लिए आपके घर आने की ज़रूरत भी तो नहीं है । भारत में बैठे ही आप अमेरिका में रहने वाले आपके दोस्त से अंतरजाल द्वारा फोटो शेअर कर सकते हैं । है न कमाल की बात ? 

और फिर आजकल तो हर मोबाईल फोन पर एक से बढ़कर एक बेहतरीन कैमरा आ रहा है । फिर कोई अगर यह कहता है कि तसवीरें लेना मुश्किल है तो फिर उसे क्या कहा जा सकता है ?
 
चलिए अब मैं आप सबसे खुद के शौक के बारे में बात करूँगा । कई सालों से मुझे फोटोग्राफी का शौक है । तबसे, जबसे डिजिटल कैमरे नहीं हुआ करते थे । तब फिल्म कैमरे हुआ करते थे । फोटोग्राफी उस वक्त बेहद महँगा शौक हुआ करता था । और आप ज्यादा तसवीरें ले भी नहीं सकते थे, क्यूंकि हर तस्वीर से एक एक्स्पोज़र चला जाता था । बहुत सोच समझ कर एक एक तस्वीर लेना होता था । आज के जैसा नहीं कि डिजिटल कैमरे से आप जितने चाहे तस्वीर ले लो, कोई फर्क नहीं पड़ता है । आज भी याद है, गुवाहाटी में मेरा फिल्म कैमरा चोरी जाने पर कितना दुःख हुआ था । 
खैर, जब डिजिटल फोटोग्राफी का चलन हुआ तो मैंने एक Olympus का कैमरा खरीदा था । छोटा सा डिजिटल कैमरा, जिसे आप आसानी से अपने पाकिट में रख कर बाहर घूम सकते हैं । जब चाहे निकालो, तस्वीर लो और फिर पाकिट के अंदर । फिर मैंने एक Canon का कैमरा खरीदा जो इतना छोटा तो नहीं था कि पाकिट के अंदर रखूं, पर “Point and Shoot” कैमरा होने के कारण इसे आसानी से साथ लिए घूम सकता था और जब चाहे तस्वीर खींच सकता था । 

खैर एक दिन यह भी आया जब मुझे यह लगने लगा कि शायद अब मैं इस कैमरा से संतुष्ट नहीं हूँ । मुझे किसी बेहतर कैमरे की तलाश थी । तब मैंने एक DSLR कैमरा खरीदा जिसे अब मैं इस्तमाल करता हूँ । इस कैमरे से जो तस्वीरें खींचता हू वो काफी सुन्दर और तकनिकी रूप से बेहतर होती हैं ।

आज इस पोस्ट के साथ मैं, मेरे द्वारा ली हुई कुछ तस्वीर यहाँ पर आप सबके लिए लगा रहा हूँ । उम्मीद है आप सबको ये तसवीरें पसंद आएगी । अगले पोस्ट में मैं यह बताऊंगा कि Camera कितने प्रकार के होते हैं और उसे कैसे इस्तमाल करना चाहिए । तब तक के लिए आज्ञा दीजिए ।


जिन मित्रों को मेरी ली हुई तस्वीर देखने हैं वो कृपया फेसबुक पर मेरा फोटोग्राफी पेज पर जाएँ या फिर मेरा Flickr account पर जाएँ !
 

Canon EOS 650D

Jan 9, 2012

पहली कोशिश .... स्टॉप मोशन फोटोग्राफी ...

सबको नए साल की हार्दिक शुभकामनायें !

दोस्तों आज बहुत दिनों बाद फिर ब्लॉग जगत का दौरा हुआ ... इस बीच दफ्तर के काम से बहुत व्यस्त हो गया था
.... आजकल, सच कहूँ, समय नहीं मिलता है कि फुर्सत से बैठूं, कुछ लिखूं .... खैर आज कुछ नया लेके आया हूँ ...
कई दिनों से सोच रहा था कि कुछ नया किया जाए  ....
कल बेटी बहुत पीछे पड़ गई कि मुझे उसके साथ खेलना है ... तो सोचा इसी बहाने कुछ नया करें ....

एनीमेशन मूभी बनाने में एक तकनीक है जिसे स्टॉप मोशन फोटोग्राफी कहते हैं ... इससे आप अपने घर बैठे, बिना कोई हाई-फाई सॉफ्टवेर के एक छोटा कार्टून मूभी बना सकते हैं ... ज़रूरत है तो केवल एक कैमरा और बच्चों के खेलने वाला क्ले, जिससे बच्चे क्ले मोडेलिंग करते हैं .... तो लीजिए मज़ा इस 3 sec  के कार्टून का जिसे मैंने खुद शूट किया है .... कथा के पात्र हैं एक आदमी और एक गेंडा ... अपनी टिप्पणियां देना न भूलिएगा ... क्यूंकि शो खतम होने के बाद ताली बजाना पड़ता है न ...





Oct 16, 2011

बिल्ली मौसी

एक बार ये हाथ में आ जाएँ, फिर तो मज़ा आ जायेगा | क्या ज़बरदस्त भोजन का इंतजाम हो जायेगा |

पर ये हाथ में आयेंगे कैसे, ये तो काफी ऊपर चढ़ बैठे हैं ...


शायद यही सोच रही है बिल्ली मौसी .... ये आज सुबह मेरे घर के बाहर का दृश्य है !


इस  चित्र को देखकर आपके मन में क्या ख्याल आ रहा है ... ज़रूर बताईएगा !

Oct 4, 2011

तीन क्षणिकाएं - नष्ट चाँद !


१)

शांत मन के झील में जो 
अक्सर उतर आता था
उज्जवल और स्पष्ट कभी,
आज इस अस्थिर चित्त 
में नहीं दिख पाता है 
अस्पष्ट चाँद !

२)

बड़ी कुटिल है
मुस्कान उसकी !
चुभती बड़ी है दिल में !
खुद झुककर मैंने 
हिला दिया पानी के 
शांत सतह को,
जाओ नहीं देखना है मुझे 
नष्ट चाँद !

३)

क्यूँ ढके रहते हो 
एक पक्ष अँधेरे में ?
कहाँ जाते हो 
अमाबस के दिन ?
इतना क्यूँ देते हो मुझे 
कष्ट चाँद ?

Sep 27, 2011

तरह तरह के ब्लॉगर - एक समीक्षा !



पिछले पांच सालों से ब्लॉग दुनिया में हूँ | हालाँकि पिछले दो सालों से सक्रीय पोस्टिंग कर रहा हूँ | इस लंबे अंतराल के दौरान कितने ही अलग अलग प्रकार के ब्लॉगर से परिचय हुआ | हर किसी का अपना अलग तरीका, अपना अलग रवैय्या, अलग स्वभाव | जैसे एक समाज में हर तरह के लोग होते हैं, वैसे ही इस ब्लॉग समाज में भी कितने प्रकार के शख्सियत हैं | मैं किसी एक का नाम या ब्लॉग की तरफ इशारा नहीं करना चाहता हूँ, बल्कि पूरा ब्लॉग समाज के बारे में बोल रहा हूँ | किसी को यदि मेरे इस वर्गीकरण में अपना अक्स नज़र आये तो इसे एक आइना समझे | आइना वही दिखाता है जो उसके सामने होता है | आप खूबसूरत हो, तो आइना खूबसूरती दिखायेगा, और आप बदसूरत हो तो बदसूरती |

और हाँ, आप से भी विनती है कि आप भी अपना अनुभव हमसे बांटे ... हो सकता है, मुझसे कुछ गुणीजन छूट गए हों .....

१.       सक्रियतम ब्लॉगर: एक दिन में १० -१२ पोस्ट ठेल देना इनके बांये हाथ का काम है | कम से कम ७-८ ब्लॉग चलाते हैं | हर ब्लॉग में रोज एक पोस्ट देते रहते हैं | इनमे भी दो तरह के ब्लॉगर होते हैं | इनके पोस्ट की गुणबत्ता या तो बहुत अच्छी हो सकती है या फिर भगवान मालिक | वैसे इन लोगों की प्रतिभा को मानना पड़ेगा, पर इनको इतना समय कहाँ से मिलता है यह एक रहस्य है जो मैं आज तक समझ नहीं पाया |
क)     सक्रियतम टिप्पणीकार: इनको केवल १०-१२ पोस्ट लिखकर ही शांति नहीं मिलती | दिन में १००-२०० टिपण्णी भी दे आते हैं और उसके एवज रोज ५०-१०० टिपण्णी भी बटोर लेते हैं |
ख)     टिपण्णी की परवाह नहीं: इनको टिप्पणिओं से कोई लेना देना नहीं होता है | पोस्ट पर टिपण्णी आये न आये, कोई इनके पोस्ट को देखे न देखे, ये रोज नियमित रूप से पोस्टिंग करते जाते हैं | इनको किसीके ब्लॉग पर जाके टिपण्णी भी नहीं करनी होती है |

२.       भटका राहगीर: जिस पथिक को ये नहीं पता हो कि कि ये कहाँ से आये हैं, और कहाँ जाना चाहते हैं, उन्हें आप भटका राहगीर ही कहेंगे न | यानि कि ऐसे शख्सियत को यह नहीं पता होता है कि वो ब्लॉग जगत में क्यूँ आये हैं, क्या करना चाहते हैं, आगे क्या करेंगे | बस दूसरों को ब्लॉग लिखते देखा तो सोच लिए कि हम भी एक ब्लॉग खोल लेते हैं | अब खोल तो लिए पर आगे क्या करना है पता नहीं | क्या लिखना है पता नहीं | बहुत जल्दी ब्लॉग्गिंग का भुत उतर जाता है, और इनका ब्लॉग NASA का कोई परित्यक्त उपग्रह जैसे ब्लॉग-महाकाश में कचड़ा बढ़ाने का काम आता है | मुझे लगता है, हिंदी ब्लॉग जगत के ३०,००० ब्लॉग में से कुछ १५००० इस वर्ग में आते हैं |

३.       पारिवारिक ब्लॉगर: पूरा ब्लोग जगत इनका परिवार है | हर किसीसे ये कोई न कोई पारिवारिक रिश्ता कायम रखते हैं | कोई माँ, कोई पिता, कोई भाई, कोई बहन | और कोई रिश्ता नहीं तो दुश्मनी का रिश्ता तो है ही | बिना कोई रिश्ता कायम किये ये आपसे बात कर नहीं सकते | केवल एक ब्लॉगर का पहचान इनके लिए काफी नहीं | इनको एक साथी ब्लॉगर होने के अलावा भी भाई, बहन, माँ, बाप, सास, ससुर, ननद-भौजाई, कुछ न कुछ होना ही होता है | 

४.       निंदक ब्लॉगर: इन लोगों को तब तक खाना हजम नहीं होता है जब तक ये दुसरे ब्लॉगर की बुराई न कर ले | “इसको लिखना नहीं आता है, उसको टिपण्णी करना नहीं आता है | अरे वो तो चरित्रहीन है | अरे इस ब्लॉगर को कोई काम धंधा नहीं है क्या ? इसने ऐसा क्यूँ लिखा ? उसने वैसा क्यूँ लिखा ? किसीने अपने बारे में लिखा तो गलत | किसीने औरों के बारे में लिखा तो गलत |” कोई कुछ भी लिखे, इन महाशय के नज़र में वो गलत ही ठहराया जायेगा | इनके ब्लॉग में जाइये, दूसरों के सारे दोष (सच या झूठ) आपको मिल जायेंगे | किसीके पोस्ट से ज्यादा ये व्यक्तिगत बातों पे हमला ज्यादा करते हैं |

५.       समालोचक ब्लॉगर: ये जनाब केवल निंदा नहीं करते हैं | जो इनको दिखता है उसे साफ साफ़ लिख देते हैं, आप को बुरा लगे या अच्छा | मुश्किल यह है कि कई बार इनको ठिक से दिखता नहीं है | इनको आप विश्लेशानाक्मक ब्लॉगर के मौसेरे भाई भी कह सकते हैं | केवल अपने ब्लॉग पर ही नहीं, आपके ब्लॉग पर आकर ये आपका पोस्ट कितना बकवास है, और उसमे कितनी गलतियाँ हैं ये बताते रहते हैं | इनका अपना पोस्ट कोई बहुत उच्च कोटि का न भी हो तो भी ये दूसरों के पोस्ट की ऐसी-तैसी करते रहते हैं |

६.       धार्मिक उन्माद: ऐसे ब्लागरों का संख्या कम नहीं है | एक ढूँढो दर्जन मिलेंगे | दूसरों के धर्म की गलतियाँ निकालना इनका परम धर्म है | ऐसा लगता है इनके धर्म में बस यही बात सिखाई जाती है | ये लोग ब्लॉग जगत में केवल धार्मिक उन्माद फ़ैलाने के उद्देश्य से आये हैं | इन लोगों से निपटने का एक ही रास्ता है, कि इनको पूरी तरह से उपेक्षा की जाय | इनकी खिलाफत भी इनको मदद करती है | इनसे जितना दूर रहो उतना अच्छा है | ये लोग खुजली वाले पौधे हैं | इनके पास जाओगे तो तकलीफ ही होगी | इनके ब्लॉग में जाना और टिपण्णी करना भी गुनाह है | इनमें से कई लोग ऐसे हैं जो धार्मिक सद्भावना के आड़ में धार्मिक उन्माद फैलाते हैं | सबसे ज्यादा खतरनाक ऐसे ब्लॉगर हैं | इन्हें पहचानिये और इनसे दूर रहिये |

७.       साहित्यिक ब्लॉगर: इनके ब्लॉग में आपको साहित्य के अलग अलग विधाओं के दर्शन होंगे | इनमें से कोई साहित्य के किसी एक विधा में पारंगत हैं, तो कोई कई विधाओं में लिखते रहते हैं |
क)     उच्च कोटि: इनको साहित्य की पूरी समझ है | ये जो भी लिखते हैं, वह उच्च कोटि का साहित्य होता है | इनको पढके आनंद आता है और कभी कभी इर्ष्या भी हो सकती है, कि ये इतना अच्छा कैसे लिख लेते हैं |
ख)     मध्यम: इनकी रचनाएँ कभी बेहतरीन होती है तो कभी बकवास | अपनी तौर पे ये पूरी कोशिश करते रहते हैं कि और अच्छा लिखे | इनमे सीखने की ललक है |
ग)      निम्न कोटि: इनको साहित्य की कोई समझ नहीं है | ये जो भी लिखते हैं वो कचड़ा पेटी में डालने योग्य हैं | इनमे भी दो प्रकार के होते हैं | प्रथम वो जो जानते हैं कि वो बकवास लिखते हैं, लेकिन फिरभी अपना बैल हांकते रहते हैं | इनको बस ब्लॉग्गिंग करना होता है | गुणबत्ता से इनको कोई लेना-देना नहीं होता है | और दूसरा वो है जिनको ये ग़लतफ़हमी होती है कि वो उच्च कोटि का साहित्यकार है | वैसे भी ब्लॉग जगत में कोई किसीकी ग़लतफ़हमी दूर नहीं करता है | करना संभव भी नहीं है |

८.       रिपोर्टर: ये ब्लॉग को एक अखबार की तरह से चलाते हैं | सब को स्थानीय या फिर प्रादेशिक/राष्ट्रीय ख़बरों से अवगत करवाते हैं | ब्लॉग जगत की खबर जैसे कि जन्मदिन इत्यादि की जानकारी देने वाले ब्लॉगर को भी मैं इसी वर्ग में रखना चाहूँगा | ब्लॉग जगत के लिए ये लोग अत्यंत ज़रूरी प्राणी हैं |

९.       तकनिकी ब्लॉगर: इनके ब्लॉग में आपको तरह तरह के तकनिकी जानकारी मिल जायेगी | मसलन कंप्यूटर के बारे में हो या इन्टरनेट के बारे में, फोन या लैपटॉप के नवीनतम मॉडल के बारे में हो या सॉफ्टवेर के बारे में | ऐसे ब्लॉग में टिपण्णी ना के बराबर आती है |

१०.    विज्ञान ब्लॉगर: ऐसे लोग विज्ञान के प्रचार प्रसार में सक्रिय भूमिका अदा करते हैं | इनके ब्लॉग में आपको तरह तरह के वैज्ञानिक जानकारी मिल जायेगी | ऐसे ब्लॉग में अक्सर टिपण्णी बहुत कम आती है | वैसे भी भारतीय समाज में विज्ञान से किसीको कोई सम्बन्ध नहीं होता है |

११.    सच्चा ब्लॉगर: इस वर्ग में मैं उन लोगों को रखा हूँ जो सही मायने में ब्लॉग्गिंग कर रहे हैं | ब्लॉग्गिंग के शैशावस्था में, ब्लॉग को केवल एक दैनिकी के रूप में इस्तमाल किया जाता था | आज इसके आयाम बहुत फ़ैल चूका है | पर कुछ लोग आज भी हैं जो ब्लॉग को केवल एक दैनिकी के रूप में ही इस्तमाल करते हैं | ब्लॉग जगत का प्राचीन रूप इनके ब्लॉग में देखने को मिलता है |

१२.    घुमक्कड ब्लॉगर: यात्रा विवरणी के बारे में ब्लॉग्गिंग करने वाले इस वर्ग में आते हैं | इनके ब्लॉग से आपको घर बैठे कई जगहों की जानकारी मिल जायेगी | इनका ब्लॉग सुन्दर चित्रों से सुसज्जित होता है |

१३.    बाल ब्लॉगर: आजकल बच्चों के बहुत सारे ब्लॉग देखने को मिलते हैं, ये अलग बात है कि इनमे से ९९ प्रतिशत बच्चों के ब्लॉग उनके माता-पिता ही चलाते हैं | मज़ा तो तब आता है, माता-पिता के लिखे हुए पोस्ट पे बच्चों को इनाम-पुरस्कार इत्यादि दिया जाता है और उनका तारीफ़ किया जात है कि ये छोटा सा ३-४ साल का ब्लॉगर कितना अच्छा ब्लॉग्गिंग करता है (भले ही उस ब्लॉग में उस बच्चे का योगदान शुन्य क्यूँ न हो) |

१४.    बाल साहित्य ब्लॉगर: इन में वो लोग आते हैं, जो बच्चों के ब्लॉग के बारे में लिखते हैं, उनका चर्चा करते हैं, उत्साहित करते हैं | ये लोग बच्चों के लिए बाल-कविता, बाल साहित्य का सृजन भी करते हैं | हमें इनका साथ हमेशा देना ही चाहिए |

१५.    चर्चाकार: ये इस ब्लॉग जगत के स्वनामधन्य और शक्तिशाली ब्लॉगर हैं | इनके रहमो-करम पाने के लिए कई ब्लॉगर हमेशा तत्पर रहते हैं | एक बार आप इनके नज़र में चढ गए कि आपको दो तरह से फायदा हो सकता है | एक तो यह कि आपके ब्लॉग का नियमित चर्चा होता रहेगा, भले ही आप अपने ब्लॉग में कूड़ा-करकट ही क्यूँ न लिखे | और दूसरा, अच्छी जान पहचान हो तो आपको भी चर्चा करने का मौका दिया जायेगा, और आप भी एक शक्तिशाली और प्रभावशाली ब्लॉगर बन सकते हैं | वैसे आप खुद भी एक चर्चा ब्लॉग का आरंभ कर सकते हैं | बहुत जल्दी आप ब्लॉग जगत में रुतबेदार बन सकते हैं |  चर्चाकार तीन प्रकार के होते हैं | एक वो जो वाकई में अच्छे पोस्ट ढूँढकर उनको अपने ब्लॉग में प्रस्तुत करते हैं और उनका समीक्षा करते हैं | दूसरा वो जो अच्छे पोस्ट ढूँढ तो निकालते हैं, और उनका लिंक भी देते हैं पर कोई समीक्षा नहीं करते हैं | और तीसरे प्रकार के चर्चाकार केवल अपने भाई बंधुओं की पोस्ट ही छापते रहते हैं | उनको पोस्ट की गुणबत्ता से कोई लेना देना नहीं होता है | जो उनसे अच्छा सम्बन्ध बनाये रखेगा (यानि कि उनके पोस्ट पे आकर बहुत सारे टिपण्णी करते रहेगा, या फिर उनके जात का होगा, या उनके धर्म का या उनके प्रान्त से होगा), उन्ही का पोस्ट छापा जायेगा चर्चा में | दूसरा कोई श्रेष्ठ साहित्य रचना भी करते रहें, उनका पोस्ट चर्चा में बिलकुल नहीं आएगा |

१६.    टिप्पणीकार: ये लोग शायद ब्लॉग जगत में केवल टिपण्णी करने के लिए आते हैं | इनके लिए उनके अपने ब्लॉग में कुछ पोस्ट करना ज़रूरी नहीं होता है | या लिखते भी हैं तो कुछ एक आध पंक्ति लिख दिए, कि मानो ब्लॉग जगत पे एहसान कर रहे हैं | हर ब्लॉग में जाते हैं और कुछ न कुछ लिख आते हैं | ऐसे ब्लॉगर पोस्ट को पढ़ना भी ज़रूरी नहीं समझते हैं | बिना पोस्ट पढ़े ही ये बहुत सुन्दर, वाह, उम्दा, बेहतरीन, लाजवाब इत्यादि लिखा आते हैं | इनमे से कई तो टिप्पणिओं को कट-पेस्ट कर रखे हैं | जब जैसे ज़रूरत हो वैसी टिपण्णी कापी किये और चिपका दिए | इनमे से कई तो एक साथ चार पांच टिपण्णी कर देते हैं | फिर मजबूरन आपको भी इनके ब्लॉग पे जाकर इनके भले/बुरे एक दो लाइना पोस्ट पे टिपियाना ही पड़ता है |

१७.    अहंकारी ब्लॉगर: थोडा बहुत अहंकार शायद हर किसी में होता है | पर कई ऐसे ब्लॉगर हैं इस ब्लॉग समाज में जिनके हर पोस्ट से उनका अहंकार झलकता है | उनके हर पोस्ट में यही लिखा होता है कि वो कितने अच्छे हैं, कितने सुशिल, शिक्षित, और खानदानी है | और किस तरह पूरा ब्लॉग जगत केवल उन्ही के कंधो पर टिका हुआ है | इनको ग़लतफ़हमी होती है कि यदि ये ब्लॉग जगत से चले गए, तो ब्लॉग जगत की बहुत बड़ी क्षति हो जायेगी | इनकी समझ में इनसे बेहतर तो कोई हो ही नहीं सकता है |

१८.  समीक्षक ब्लॉगर: ये लोग हर बात का विश्लेषण/समीक्षा करते रहते हैं | इनके ब्लॉग पे आकर आपको कई मसलों की अंदरूनी बातें जानने को मिलेगी | कई बार इनके पोस्ट विश्लेषण/समीक्षा के कारण काफी लंबे हो जाते हैं | इतने लंबे पोस्ट पढ़ना आसान नहीं होता है | पर जो भी पढ़ पाता है उसे फायदा ही होता है | ये पोस्ट खुद एक इसी तरह का पोस्ट है |

१९.    राजनैतिक ब्लॉगर: ये लोग ब्लॉग्गिंग के दुनिया में इसलिए आते हैं ताकि वो अपना राजनैतिक भविष्य उज्जवल कर सके | या तो वो किसी पार्टी से जुड़े होते हैं, जिसका गुणगान वो करते रहते हैं, या फिर दूसरी पार्टी की बुराई | यदि ये किसी पार्टी से न भी जुड़े हुए हों तो इनके सगे सम्बन्धियों में कोई न कोई किसी न किसी पार्टी से जुड़े होते हैं | ये तो बस उस पार्टी का समर्थन करते नज़र आते हैं | उस पार्टी के सारे दोष माफ होता है और गुण (हो न हो), बढ़ा चढा कर पेश किया जाता है | भविष्य में कभी राजनैतिक अखाड़े में उतरना हो तो उसका रास्ता साफ़ करते रहते हैं |

२०.    निर्लिप्त ब्लॉगर: इस तरह के ब्लॉगर बहुत दिलचस्पी से ब्लॉग्गिंग तो करते हैं, पर उनको, ब्लॉग जगत में चल रहे बहस बाजी, गुट-बाजी, धार्मिक उन्माद, राजनैतिक दाव-पेंच, यहाँ तक कि टिप्पणिओं से भी कोई लेना देना नहीं होता है | ये अपने रचनात्मकता में मगन, एक के बाद एक सुन्दर पोस्ट डालते जाते हैं | आप इनसे अच्छा सम्बन्ध रखो तो ये आपके ब्लॉग पर आकर टिपण्णी भी दे जाते हैं | इनका सम्बन्ध सभी से अच ही रहता है | देखा जाय तो ये सबसे कम प्रभावशाली ब्लॉगर माने जाते हैं | ब्लॉग जगत के महामहिम चर्चाकार, राजनेता/नेत्री, टिप्पणीकार, इनको पूछते नहीं है | वैसे इनको किसी के पूछने न पूछने से कोई फर्क भी नहीं पड़ता है |

२१.    आशिक ब्लॉगर: खासकर महिलाओं के ब्लॉग में जाकर मीठी मीठी टिपण्णी करना इनका दैनन्दिनी है | इस काम में इनको महारत हासिल है | इनके टिप्पणिओं से साफ़ पता चलता है, कि ये पोस्ट पढते भी नहीं हैं, बस महिलाओं को मधुर संगीत सुनाने में विश्वास रखते हैं | आश्चर्य की बात तो यह है, कि कई महिलाओं को यह लगता है कि यह उनके ब्लॉग के नियमित और गंभीर पाठक हैं | धीरे धीर ये उस महिला से व्यक्तिगत तौर पे सम्बन्ध बनाने की कोशिश करना शुरू कर देते हैं | आप इनका मंशा ताड़ गए तो बच गए | और आप को ये अपना करीबी दोस्त लगने लगे, तो फिर आपकी खैर नहीं | वैसे, ये जितनी जल्दी आपसे अंतरंगता बढ़ाते हैं, उतनी ही जल्दी रूप भी बदलते हैं | यदि आपने इनको घास नहीं डाला तो अचानक इनका रूप बदल जाता है, और हर ब्लॉग पे जाके ये आपकी बुराई करते नहीं थकते |

२२.    हुनरमंद ब्लॉगर: कई ऐसे लोग हैं जो अपने ब्लॉग पे अपना हुनर दिखाते रहते हैं | इनमे कई लोग फोटोग्राफी का शौक रखने वाले होते हैं, अपना लिया हुआ फोटो चिपकाते रहते हैं | कोई खुद का बनाया हुआ चित्र, कलाकृति इत्यादि दिखाते हैं | कोई अपनी आवाज़ में गाया हुआ गाना सुनाता है |

२३.   सिनेमा सम्बन्धी ब्लॉगर: कई ब्लॉगर ऐसे हैं जो बॉलीवुड या होलीवूड से सम्बंधित पोस्ट डालते रहते हैं | इनके ब्लॉग पर जाकर आपको सिनेमा के बारे में दिलचस्प खबरें, गानों के लिंक इत्यादि मिलेंगे | इनमे से कई ब्लॉगर, आपको लिंक के अलावा ज़रूरी जानकारी भी देते रहते हैं | मेरा अपना एक ब्लॉग इस वर्ग में आता है (Copycats) |

तो यह तो था ब्लॉग जगत का वर्गीकरण, जितना मुझे समझ में आया | मैं इनमे से किस वर्ग में आता हूँ यह तो मेरे ब्लॉग के पाठक ही बताएँगे | आप खुदको कहाँ पाते हैं ? यदि आप इस वर्गीकरण में कुछ और योगदान करना चाहते हैं तो आप का स्वागत है |
(व्याकरण की गलतियाँ माफ कर दीजियेगा)

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