Indranil Bhattacharjee "सैल"

दुनियादारी से ज्यादा राबता कभी न था !
जज्बात के सहारे ये ज़िन्दगी कर ली तमाम !!

अपनी टिप्पणियां और सुझाव देना न भूलिएगा, एक रचनाकार के लिए ये बहुमूल्य हैं ...

Oct 11, 2012

तरह तरह के डिजिटल कैमरे



डिजिटल कैमरा यानि कि डिजिकैम, साउंड, वीडियो और स्टिल फोटोग्राफ लेकर उन्हें एक इलेक्ट्रॉनिक इमेज सेंसर के माध्यम से रिकॉर्ड कर लेता है |

डिजिटल कैमरे के कई फायदे हैं | जैसे कि तस्वीर लेने के तुरंत बाद आप कैमरे के स्क्रीन पर आप उस तस्वीर को देख सकते हैं | पहले फिल्म कैमरा के युग मे हर तस्वीर बहुत सोच समझ कर लेना पड़ता था क्यूंकि तस्वीर खराब आई तो फिल्म का एक एक्स्पोज़र बर्बाद हो जाता था और फिल्म महंगे आते थे | आज आप डिजिटल कैमरे से जितने चाहे तस्वीर ले सकते हैं और उन्हें कैमरे के मेमोरी कार्ड मे सेव कर सकते हैं | बाद में आपकी इच्छानुसार आप कुछ तस्वीर रख कर बाकी के डिलीट कर सकते हैं | एक फायदा यह भी है कि अब स्टिल और वीडियो दोनों एक ही कैमरे से रिकार्ड कर सकते हैं | एक ही मेमोरी कार्ड को आप बार बार इस्तमाल कर साकेत हैं | चित्रों मे इच्छानुसार काट-छांट कर साकेत हैं, उनको सोफ्टवेयर की मदद से बेहतर बना साकेत हैं | रासायनिक का प्रयोग न होने के कारण, अब आपको अपने द्वारा लिए हुए तस्वीर देखने के लिए किसी स्टूडियो मे जाने की ज़रूरत नहीं होती है | घर बैठे अपने कंप्यूटर पर अपनी तसवीरें आराम से देख सकते हैं |
वैसे तो कैमरे के कई प्रकार होते हैं | खगोल विद्या मे प्रयुक्त उच्च क्षमता संपन्न कैमरे से लेकर जासूसी मे प्रयुक्त छोटे छोटे कैमरे तक हैं | पर आज यहाँ पर मैं केवल उन कैमरों के बारे मे बात करूँगा जो आम तौर पर हम इस्तमाल करते हैं |
तो दोस्तों, इन आम तौर पर इस्तमाल होने वाले डिजिटल कैमरों के प्रकार हैं:
१.      कॉम्पैक्ट डिजिटल कैमरा
२.      ब्रिज कैमरा
३.      डिजिटल सिंगल लेंस रिफ्लेक्स कैमरा
४.      डिजिटल सिंगल लेंस ट्रांस्लुसेंट कैमरा
५.      मिररलेस इंटरचेंजिअबल लेन्स कैमरा
कॉम्पैक्ट डिजिटल कैमरा
सबसे ज्यादा इस्तमाल होने वाले कॉम्पैक्ट कैमरों को पॉइंट-ऐंड-शूट कैमरा भी कहा जाता है | ये आकार मे छोटे से होते हैं और आराम से पाकिट मे रखकर कहीं भी लिया जा सकता है | मोबाईल फोन में जो कैमरा होता है वो भी इसी प्रकार का होता है | कुछ कॉम्पैक्ट कैमरे बहुत ही छोटे और हलके होते हैं | इन्हें "अल्ट्रा-कॉम्पैक्ट" कहा जाता है | कॉम्पैक्ट कैमरे ज्यादातर साधारण तस्वीर खींचने के लिए इस्तमाल होते हैं | घर के सदस्यों के, पार्टीज़ के, कहीं घूमने गए, या फिर बगीचे मे बच्चे खेल रहे हैं उनके | ज्यादातर कॉम्पैक्ट में तस्वीर केवल JPG फॉर्मेट में ही सेव होते हैं | ज्यादातर कॉम्पैक्ट कैमरों में इन-कैमरा फ्लैश होते हैं जो बहुत ज्यादा शक्तिशाली नहीं होते हैं | उनकी वीडियो क्षमता सिमित होती है | उनसे Macro तसवीरें भी ली जा सकती है | कुछ कॉम्पैक्ट कैमरों में ज़ूम भी होता है पर वो 3X से लेकर 8X तक ही सिमित होता है | आपको जानकर ताज्जुब होगी कि कुछ नवीनतम मॉडल के कैमरों में तो चेहरा पहचानने (Face detection technology) मुस्कुराहट पहचानने (Smile Detection technology) की भी तकनीक है ।
इनके सेंसर का साइज़ छोटा होता है (6.17 mm X 4.55 mm – 1.2.5”) | पर कुछ कॉम्पैक्ट कैमरों में 7.44 mm X 5.58 mm – 1/1.7” साइज़ के सेंसर भी रहते हैं | इन्हें प्रीमिअम कॉम्पैक्ट कहा जाता है और ये आम कॉम्पैक्ट कैमरों से महंगे आते हैं | आजकल तो इससे भी बड़े सेंसर साइज़ वाले कॉम्पैक्ट कैमरे बन रहे हैं | ज़ाहिर है कि इनका दाम भी सेंसर के साइज़ के हिसाब से बढ़ते जाते हैं | यहाँ तक कि DSLR जितने बड़े सेंसर वाले कॉम्पैक्ट कैमरे भी बाज़ार मे उपलब्ध हैं |

ब्रिज कैमरा
कॉम्पैक्ट से आकार में बड़े कुछ ऐसे कैमरे बाज़ार में बिकते हैं जिन्हें “ब्रिज” या SLR-Like” कैमरे कहे जाते हैं | इनका सेंसर का साइज़ तो कॉम्पैक्ट कैमरे जितने ही होते हैं पर इनमे बहुत सारी ऐसी सुबिधायें होती हैं तो आम कॉम्पैक्ट कैमरों में नहीं होती है | इनकी बनावट तो DSLR जैसे होती है, कार्यक्षमता भी थोडा बहुत DSLR कैमरों जैसा होता है | गलत मत समझिए, DSLR जैसे दिखने वाले ये कैमरे DSLR जितना शक्तिशाली और अच्छे से काम नहीं करते | कॉम्पैक्ट के मुकाबले इनमें कुछ उन्नत सुविधाएं उपलब्ध होती हैं | कॉम्पैक्ट जैसे ही इनमे छोटा सेंसर प्रयोग होता है, live-view सुविधा होती है और autofocus की सुविधा होती है | इसके अलावा ब्रिज कैमरों में Manual Focus की सुविधा, Manual mode, Shutter Prioirity mode और Aperture priority mode भी होते हैं जो कॉम्पैक्ट  कैमरों मे नहीं होते हैं | खास कर इनमे अधिक ज़ूम शक्ति होती है जो प्रायः 10X से 15X तक होती है | आजकल 20X से 50X तक के ज़ूम वाले ब्रिज कैमरे बन रहे हैं जिन्हें सुपरज़ूम या अल्ट्राज़ूम भी कहा जाता है | ज्यादा ज़ूम होने के कारण इनसे ली गई तस्वीर धुंधला आने की सम्भावना होती है| तस्वीर लेते समय हाथ हिलने के कारण तस्वीर में Blur (धुंधलापन) आ सकता है जो जायदा ज़ूम के कारण बहुत ज्यादा हो सकता है | इस समस्या को हल करने के लिए इनमें Image Stabilisation (चित्र स्थिरीकरण) प्रणाली का इस्तमाल होता है | ऐसे कैमरों में स्क्रीन के अलावा एक इलेक्ट्रोनिक व्यूफाइंडर भी होता है जिससे आप बटन दबाने से पूर्व दृश्य का अवलोकन कर सकते हैं | ऐसे कैमरों में In-camera फ्लैश उपलब्ध होता है जो DSLR जैसे Pop-out होते हैं और इनमे तस्वीर RAW और JPG दोनों फॉर्मेट में सेव होते हैं |

डिजिटल सिंगल लेंस रिफ्लेक्स कैमरा
डिजिटल सिंगल-लेंस रिफ्लेक्स कैमरा यानि कि DSLR एक ऐसा कैमरा है जिसमे इलेक्ट्रोनिक व्यूफाइंडर के वजय ऑप्टिकल व्यूफाइंडर होता है | यह प्रणाली प्रकाश को सीधे लेन्स से एक पेंटामिरर या पेंटाप्रिज्म द्वारा व्यूफाइंडर तक पहुंचाता है | फिल्म ज़माने के SLR कैमरा प्रणाली पर आधारित यह कैमरा, फिल्म के वजाय इलेक्ट्रोनिक सेंसर इस्तमाल करती है | सेंसर के सामने एक छोटा सा आइना होता है जो प्रकाश को पेंटामिरर या पेंटाप्रिज्म तक रिफ्लेक्ट कर देता है | जैसे ही हम शटर बटन दबाते हैं, यह आइना प्रकाश मार्ग से हट जाता है और रौशनी सेंसर तक पहुँच जाती है | कॉम्पैक्ट या ब्रिज कैमरा जैसे इलेक्ट्रोनिक व्यू-फाइंडर न होकर इनमे ऑप्टिकल व्यू-फाइंडर होता है जिससे सामने का वस्तु बेहतर ढंग से दिखाई देता है |
पुराने DSLR कैमरों मे लाइव-व्यू नहीं होता था | पर आजकल के DSLR कैमरों में यह तकनीक सम्मिलित कर लिया गया है | DSLR कैमरों मे सेंसर का आकार बड़ा होता है | लगभग 23 mm X 15 mm – 1.5” सेंसर वाले DSLR कैमरों को APSC DSLR कहा जाता है (जो कि एक crop सेंसर है) | 36 mm X 24 mm सेंसर वाले कैमरों को फुल फ्रेम सेंसर कैमरे कहे जाते हैं और इनके दाम APSC सेंसर वाले कैमरों से ज़्यादा होता है | इनके अलावा भी कुछ बहुत बड़े सेंसर वाले कैमरे हैं जो कि बहुत ही महंगे होते हैं | इन्हें Medium format (48 mm X 36 mm) या Large Format (4” X 5” से बड़ा) कहा जाता है | पर इनके दाम USD 15000 से ज़्यादा ही होता है जोकि साधारण व्यक्ति के पहुँच के बाहर है |
DSLR कैमरों के फायदे यह है कि इनमें Manual Focus की सुविधा, Manual mode, Shutter Prioirity mode और Aperture priority mode तो होते ही हैं, पर आजकल इनमें अन्य कई सुबिधायें आ रही हैं, जैसे कि “In-Camera HDR mode”, “Hand-Held Night Scene mode” इत्यादि | आजकल सभी नए DSLR में लाइव व्यू सिस्टम होता है | कानों ने हाल ही में एक ऐसा DSLR कैमरा बाज़ार मे छोड़ा है जिसमें Touch-screen भी है (Canon EOS 650D) | DSLR कैमरा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपने मनचाहे लेन्स लगा सकते है और लेन्स बदल बदल कर तस्वीर ले सकते हैं, जैसे कि वाइड-ऐंगल, टेलीफोटो या प्राइम लेन्स इत्यादि | कई बड़े DSLR निर्माता विभिन्न प्रकार के लेंसों भी बनाते हैं जिन्हें ख़ास तौर पर उनके कैमरों में प्रयुक्त करने के विचार से निर्मित किया जाता है | चूँकि DSLR कैमरे वजन मे काफी भारी होते हैं, इसलिए इन्हें प्रयोग करने के लिए एक Stand की ज़रूरत होती है | साधारण रूप से आप कम समय के लिए उसे अपने हाथों मे लिए घूम सकते हैं, तस्वीर भी ले सकते हैं, पर यदि आपको कम रौशनी में Low shutter speed से तस्वीर लेने हो या HDR तस्वीर लेने हो, या मान लीजिए बहुत अच्छी तरह से फोकस करना हो, तो Stand की ज़रूरत पड़ती ही है | इनके दाम लगभग रु २०,००० से लेकर रु ४००,००० तक होता है |
चूँकि आप DSLR कैमरों के लेन्स बदल सकते हैं, आपको Focal length में भी बहुत ज्यादा फायदे मिलते हैं | जैसे कि यदि आप किसी Landscape की तस्वीर खींचना चाह रहे हों, तो एक Wide-angle लेन्स लगा लें जिसका Focal length लगभग 10 mm से 20 mm तक हों | या शायद आप दूर किसी पेड़ पर बैठे किसी चिड़िया की तस्वीर लेना चाहते हैं | कोई बात नहीं, एक Telezoom लेन्स लगा लीजिए जिसका Focal length 400 mm से 600 mm तक हो सकता है | इसका नुक्सान यह है कि आपको अपने साथ बड़े छोटे बहुत सारे लेन्स लेकर घूमना पड़ सकता है |

डिजिटल सिंगल लेंस ट्रांस्लुसेंट कैमरा
सोनी कंपनी द्वारा बनाया गया एक तरह के कैमरे हैं डिजिटल सिंगल लेंस ट्रांस्लुसेंट कैमरा (SLT) | ये DSLR जैसे ही होते हैं पर इनमें सेंसर के सामने आम आईने के वजाय एक ऐसा अर्ध-पारदर्शी आइना लगे जाता है जो ज़्यादातर रौशनी को रोके बिना सेंसर तक पहुँचने देता है और थोड़ी बहुत रौशनी को एक दूसरे phase detection सेंसर की ओर मोड़ देता है | इससे फायदे यह होता है कि कैमरे के लिए लगातार phase detection करना आसान हो जाता है | तस्वीर लेते समय यह अर्ध-पारदर्शी आइना अपनी जगह से हिलता नहीं है | इनमें DSLR जैसे ऑप्टिकल व्यू-फाइंडर नहीं होता है बल्कि कॉम्पैक्ट या ब्रिज कैमरा जैसे इलेक्ट्रोनिक व्यू-फाइंडर होता है, लेकिन DSLR जैसे ही हम इनमे लेन्स बदल सकते हैं | वैसे तो यह तकनीक पहले से ही मौजूद था, पर सोनी ने इस तकनीक के कैमरे ही ज्यादातर बनाकर बाज़ार में छोड़ा और इन्हें लोकप्रिय बनाया | ऐसे कैमरों के फायदे यह है कि इनका Auto Focus क्षमता DSLR कैमरों से बेहतर होती है और ये DSLR कैमरों से तेज होते हैं | इनमें भी APSC या Full Frame सेंसर होते हैं | इनका इलेक्ट्रोनिक व्यू-फाइंडर DSLR कैमरों के ऑप्टिकल व्यू-फाइंडर से बड़े होते हैं | इनमें स्थित अर्ध-पारदर्शी आइना अपनी जगह से न हिलने के कारण, ये कैमरा हिलता कम है और बिना Stand के भी तस्वीर धुंधलाती नहीं है | इनमें कमी यह है कि इनकी तसवीरें DSLR के मुकाबले उतनी अच्छी नहीं होती है | 

मिररलेस इंटरचेंजिअबल लेन्स कैमरा
इस तरह के कैमरे को DSLR और कॉम्पैक्ट डिजिटल कैमरा के बीच का एक समन्वय माना जा सकता है | यह एक ऐसी तकनीक है जिसमे कैमरा का अंदरूनी तकनीक तो कॉम्पैक्ट डिजिटल कैमरा जैसा ही है, पर लेन्स परिवर्तनीय है, जो कि कॉम्पैक्ट डिजिटल कैमरा में नहीं होता है | इनका व्यू-फाइंडर इलेक्ट्रोनिक होता है, और इनमें जो सेंसर होते हैं वो साधारणतया कॉम्पैक्ट डिजिटल कैमरा के सेंसर से बड़े होते हैं | इनमे APSC साइज़ के सेंसर भी इस्तमाल होते हैं और उनसे छोटे भी | इनमें से सबसे ज्यादा प्रचलित सेंसर हैं 4/3rd सेंसर जो APSC सेंसर से थोडा छोटा होता है पर कॉम्पैक्ट डिजिटल कैमरा के सेंसर से बड़ा होता है | इनका फायदा यह है कि आकार मे यह DSLR या SLT जितने बड़े नहीं होते हैं | इनका लेन्स का आकार भी उतना बड़ा नहीं होता है | इसलिए इन्हें पाकिट मे लेकर घूमना आसान है | पर बड़ा सेंसर, परिवर्तनीय लेन्स उत्यादी के कारण इनका दाम कॉम्पैक्ट डिजिटल कैमरा के मुकाबले ज्यादा होता है | 

कैमरा कंपनियां
आज के बाज़ार में कई कम्पनियां तरह तरह के कैमरे बेचते हुए नज़र आते हैं | कॅनन  (Canon), निकॉन (Nikon), सोनी (Sony), ओलिंपस (Olympus), मिनोल्टा (Minolta), पेंटैक्स (Pentax), पेनासोनिक (Panasonic) इत्यादि कंपनियों के कई मॉडल के कैमरे और लेन्स बाज़ार में उपलब्ध हैं । इनके अलावा Tamron, Tokina, Sigma जैसी कंपनियां लेन्स बनाती हैं जो उपरोक्त कैमरों में लगाये जा सकते हैं | इनमें से किसी भी कंपनी को किसी और से कमतर या बेहतर बताना मुश्किल है ।  हर बार मामला व्यक्तिगत पसंद, नापसंद का आ जाता है । हालाँकि लेन्स के मामले मे तो मैं यही कहूँगा कि कैमरा बनाने वाली कंपनियों द्वारा बनाये गए लेन्स, यद्दपि तुलनामुलक रूप से महंगे हैं, तथापि गुणबत्ता की दृष्टि से बेहतर होते हैं |
कुछ लोग डिजिटल कैमरे में कितना मेगापिक्सेल होना चाहिए इस बात को लेकर बड़े चिंतित रहते हैं | उनको लगता है कि जितने ज्यादा मेगापिक्सेल होंगे तस्वीर उतनी अच्छी आएगी | यह एक गलत धारणा है | तस्वीर की गुणबत्ता मेगापिक्सेल पर निर्भर न होकर कैमरा के लेन्स की गुणबत्ता पर निर्भर करती है |

इनके अलावा भी कई और तरह के कैमरे होते हैं जिनके बारे में यहाँ कुछ लिखना मैं ज़रुरी नहीं समझता हू क्यूंकि यह आम प्रयोग में नहीं आते हैं | कैमरा खरीदते समय यह ध्यान रखना ज़रुरी होता है कि आप उस कैमरा को किस तरह और किसलिए प्रयोग करने वाले हैं | मसलन, यदि कोई पक्षियों की तस्वीर लेना पसंद करता हो और उसके पास पैसा हो तो उसे अच्छे DSLR या SLT कैमरा खरीदना चाहिए, और साथ मे Telezoom लेन्स | यदि कोई बस घर के सदस्यों का चित्र लेता हो, जैसे कि बस बच्चों के खेलने की तस्वीर, किसी घर आये अतिथि की तस्वीर इत्यादि तो उसका काम एक कॉम्पैक्ट डिजिटल कैमरा से भी चल जायेगा | आपके पास पैसा हो तो आप महंगे से महंगा कैमरा खरीद सकते हैं | पर यदि आप उसे ढंग से इस्तमाल न कर पाएं तो मैं तो इसे पैसे की बर्बादी ही कहूँगा | वहीँ दूसरी तरफ यदि आपमें बेहतरीन फोटोग्राफी करने का शौक या ललक हो, तो ज़रूर कोई अच्छा कैमरा खरीदना चाहिए |

मेरा पहला डिजिटल कैमरा एक कॉम्पैक्ट डिजिटल कैमरा था, दूसरा एक ब्रिज कैमरा और तीसरा DSLR | मुझा लगता है फोटोग्राफी के सफर मे मैं धीरे धीरे आगे बढ़ रहा हूँ | आपका क्या ख्याल है ?

जिन मित्रों को मेरी ली हुई तस्वीर देखने हैं वो कृपया फेसबुक पर मेरा फोटोग्राफी पेज पर जाएँ या फिर मेरा Flickr account पर जाएँ !

अगली कढ़ी में मैं डिजिटल कैमरे के मोडस के बारे मे बताऊंगा | आते रहिये और फोटोग्राफी की दिलचस्प दुनिया के बारे मे जानिये |

Oct 8, 2012

फोटोग्राफी - शौक या पेशा ?

Canon Powershot SX30IS


फोटोग्राफी हमारे दुनिया देखने का तरीका बदल सकती हैं । रोज कि जिंदगी मे दिखते बेरौनक और बेहद मामूली चीज़ों को कैमरे के क्लिक से वो सौंदर्य मिल सकता है जिसे हम कभी सोचे भी नहीं थे । आज फोटोग्राफी महज एक पेशा भर नहीं है, बल्कि हर इंसान के लिए एक ऐसा मौका है जिससे वो अपनी यादों को संजो कर रख सकता है और खुद के सौंदर्य बोध को नए तरीके से दुनिया के सामने ला सकता है । फोटोग्राफी न केवल एक शौक है बल्कि आज के समाज मे एक बेहतरीन करियर के रूप मे उभर रहा है । यदि आपमें सौंदर्य बोध है और आप अच्छे से सीखना चाहते हैं, तो फोटोग्राफी को आप या तो एक शौक या करियर के रूप में चुन सकते हैं । ये आपको शोहरत, दौलत तो दिलाता ही है,  बल्कि इतिहास में जगह बनाने का मौका भी देता है । कई तस्वीरें ऐसी हैं, जो इतिहास के पन्नों पर अमर हो गई हैं । खास कर National Geographic Magazine के मुखपृष्ठ पर प्रकाशित “The Afghan girl” के बारे मे कौन नहीं जानता । 

पेशे के तौर पर देखा जाए तो फोटोग्राफी में कॅरियर बनाने के लिए आपको डिग्री व डिप्लेामा कोर्स की ज़रूरत होगी । फोटोग्राफी की ज़रूरत आज समाज की कई बातों मे होती है, जैसे कि पत्रकारिता, शादी-व्याह, फैशन, विज्ञापन, वन्य जीवन संरक्षण, पोर्ट्रेट, फोरेंसिक, फ्री लांसिंग, शिल्प इत्यादि । और तो और तस्वीरों को कई बार अदालत में सबूत के तौर पर भी इस्तमाल की गई है । आपके मोहल्ले के फोटोग्राफर के बारे में तो आप जानते ही होंगे, जिसके पास आप पासपोर्ट साइज़ फोटो खिंचवाने के लिए जाते हैं । भारत में सबसे ज्यादा तादाद शादी के फोटोग्राफरों का है क्यूंकि यह बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है ।

फोटोग्राफी का स्वरुप आज बदल चूका है । फिल्म कैमरे से फोटोग्राफी के दिन अब गुज़र चुके है । हाँ, पर कई फोटोग्राफर आज भी विशेष समय पर फिल्म कैमरा इस्तमाल करना पसंद करते हैं । 

डिजिटल कैमरे के फायदे ये हैं कि आप जितने चाहे तस्वीर ले लें । कोई फिल्म बर्बाद होने वाले तो नहीं है । एक ही चीज़ की १०० तस्वीर ले लो, और फिर उसमें से जो आपको अच्छा लगे, वो रखकर बाकी डिलीट कर दो । हालाँकि डिजिटल कैमरे के भाव फिल्म कैमरे से ज्यादा है । और फिर डिजिटल तस्वीरें देखने के लिए या उन्हें सँवारने के लिए आपको कंप्यूटर और विशेष सॉफ्टवेर की ज़रूरत होती है । पर आज के ज़माने में, शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहाँ कंप्यूटर न हो । और जहाँ तक तस्वीरें प्रोसेस करने की बात है तो कई सॉफ्टवेर तो मुफ्त में अंतरजाल पर उपलब्ध हैं । अब तो तस्वीरें कोई भारी भरकम एलबम में नहीं लपेटी जातीं हैं । आप जितनी चाहे तसवीरें खींचे और उन्हें अपने कंप्यूटर पर या DVD या Hard-disk में सेव कर लें । पहले आपके घर में कोई मेहमान आये तो उनको अपने शादी-व्याह या फिर यात्रा की तसवीरें दिखाने के लिए, अलमारी के सबसे ऊपर वाले रैक से कपड़ो के नीचे दबे मोटा एल्बम निकालना पड़ता था । आज किसी को अपनी तसवीरें दिखाना हो तो, कंप्यूटर के स्क्रीन पर आसानी से दिखाया जा सकता है, जो उन छोटे छोटे 4X6 के प्रिंट से कहीं बेहतर और बड़े दिखते हैं । और फिर किसी को तस्वीर देखने के लिए आपके घर आने की ज़रूरत भी तो नहीं है । भारत में बैठे ही आप अमेरिका में रहने वाले आपके दोस्त से अंतरजाल द्वारा फोटो शेअर कर सकते हैं । है न कमाल की बात ? 

और फिर आजकल तो हर मोबाईल फोन पर एक से बढ़कर एक बेहतरीन कैमरा आ रहा है । फिर कोई अगर यह कहता है कि तसवीरें लेना मुश्किल है तो फिर उसे क्या कहा जा सकता है ?
 
चलिए अब मैं आप सबसे खुद के शौक के बारे में बात करूँगा । कई सालों से मुझे फोटोग्राफी का शौक है । तबसे, जबसे डिजिटल कैमरे नहीं हुआ करते थे । तब फिल्म कैमरे हुआ करते थे । फोटोग्राफी उस वक्त बेहद महँगा शौक हुआ करता था । और आप ज्यादा तसवीरें ले भी नहीं सकते थे, क्यूंकि हर तस्वीर से एक एक्स्पोज़र चला जाता था । बहुत सोच समझ कर एक एक तस्वीर लेना होता था । आज के जैसा नहीं कि डिजिटल कैमरे से आप जितने चाहे तस्वीर ले लो, कोई फर्क नहीं पड़ता है । आज भी याद है, गुवाहाटी में मेरा फिल्म कैमरा चोरी जाने पर कितना दुःख हुआ था । 
खैर, जब डिजिटल फोटोग्राफी का चलन हुआ तो मैंने एक Olympus का कैमरा खरीदा था । छोटा सा डिजिटल कैमरा, जिसे आप आसानी से अपने पाकिट में रख कर बाहर घूम सकते हैं । जब चाहे निकालो, तस्वीर लो और फिर पाकिट के अंदर । फिर मैंने एक Canon का कैमरा खरीदा जो इतना छोटा तो नहीं था कि पाकिट के अंदर रखूं, पर “Point and Shoot” कैमरा होने के कारण इसे आसानी से साथ लिए घूम सकता था और जब चाहे तस्वीर खींच सकता था । 

खैर एक दिन यह भी आया जब मुझे यह लगने लगा कि शायद अब मैं इस कैमरा से संतुष्ट नहीं हूँ । मुझे किसी बेहतर कैमरे की तलाश थी । तब मैंने एक DSLR कैमरा खरीदा जिसे अब मैं इस्तमाल करता हूँ । इस कैमरे से जो तस्वीरें खींचता हू वो काफी सुन्दर और तकनिकी रूप से बेहतर होती हैं ।

आज इस पोस्ट के साथ मैं, मेरे द्वारा ली हुई कुछ तस्वीर यहाँ पर आप सबके लिए लगा रहा हूँ । उम्मीद है आप सबको ये तसवीरें पसंद आएगी । अगले पोस्ट में मैं यह बताऊंगा कि Camera कितने प्रकार के होते हैं और उसे कैसे इस्तमाल करना चाहिए । तब तक के लिए आज्ञा दीजिए ।


जिन मित्रों को मेरी ली हुई तस्वीर देखने हैं वो कृपया फेसबुक पर मेरा फोटोग्राफी पेज पर जाएँ या फिर मेरा Flickr account पर जाएँ !
 

Canon EOS 650D

Jul 10, 2012

दूसरी कोशिश .... स्टॉप मोशन फोटोग्राफी ...

कई दिनों से फोटोग्राफी में अपना हाथ आजमा रहा हूँ | काफी कुछ सीखा भी | धीरे धीरे आप सब के साथ वो ज्ञान (जो थोडा सा अर्जित हुआ है ) बांटूंगा | फ़िलहाल आप सब के लिए ला रहा हूँ स्टॉप मोशन फोटोग्राफी से लिया हुआ एक और मजेदार फिल्म | पहली कोशिश मैंने आप सबके लिए ब्लॉग पे लगाये थे | आज जो फिल्म लगाने जा रहा हूँ वो बच्चों के लिए एक और मजेदार कार्टून फिल्म है | आप अपने बच्चे को ये फिल्म दिखा सकते हैं |

Jul 8, 2012

क्या हिंदी एक निकृष्ट भाषा है ?


फेसबुक पर श्रीमान महफूज़ अली जी की एक बात पढकर मेरा मन सोचने पर विवश हो गया | महफूज़ ने लिखा है कि वो हवाई जहाज से यात्रा करते समय हिंदी ब्लॉग खोलने पर लोग उन्हें हिकारत की नज़र से देखने लगे | इससे उन्हें दुःख हुआ एवं वो इस बात पे सबकी दृष्टि आकर्षित करने के लिए फेसबुक पे इसका ज़िक्र किया | उनकी यह पोस्ट पढकर मैं भी यह सोचने लगा कि आखिर ऐसा क्यूँ है |
बहुत सोचने पर पाया कि जो भारतीय लोग हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओँ को निम्न कोटि के मानते हैं यह दरअसल उनकी गलती नहीं है | २०० साल अंग्रेजों की गुलामी के बाद यह स्वाभाविक है कि प्रभु की भाषा को प्राधान्य दी जाय और उसे ही श्रेष्ठ समझा जाय और खुद की भाषा को निकृष्ट | और फिर हिंदी के प्रचार प्रसार और उन्नति के लिए कोई काम हुआ भी तो नहीं है | जहाँ अंगरेजी में निरंतर उन्नति और बदलाव आते गए, वहीँ हिंदी एक ठहराव में फंसकर रह गई | आज ज़रूरी हो गया है कि हम भारतीय भाषाओँ में उन्नति लायें | और यह तभी संभव होगा जब हम
  1. अपनी भाषा पे गर्व करना सीखे – गुलाम मानसिकता से बाहर निकलना ज़रूरी है | अंग्रेज हमें यह सिखाकर गए हैं कि उनकी हर बात अच्छी और हमारी हर बात घटिया है | यह बात हमारे दिलो-दिमाग में रच-बस गई है | हमें इस बात को भूलना होगा | नए सीरे से अपनी भाषा से प्यार करना होगा | इस बात को समझना होगा कि जो लोग अपनी भाषा को भूलकर केवल अंगरेजी से प्यार करते हैं ... वो दरअसल आज भी मानसिक रूप से गुलाम हैं | देश में सच्ची आज़ादी तभी आ पायेगी जब हमें इन मानसिक बेड़ियों को तोड़ पाएंगे | अंगरेजी एक वैश्विक भाषा है | उसे सीखना गलत नहीं है ये यूँ कहे अंगरेजी कोई घटिया भाषा नहीं है | पर अंगरेजी सीखने का मतलब यह नहीं है कि हम अपनी भाषाओं को भूला दें |
  2. अपनी भाषा कि उन्नति के लिए कोशिश करें - यदि उसमे बदलाव कि ज़रूरत है तो वह बदलाव लाएं | तकनिकी क्षेत्र में हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं को प्रयोग करें और उसके लिए ज़रूरी शब्द बनाएँ | अंगरेजी भाषा केवल इसलिए वैश्विक भाषा नहीं बनी कि अंग्रेजों की भाषा है | बल्कि उसके पीछे कारण यह है कि अंगरेजी समय के साथ तेजी से बदलती गई और उन्नति करती गई | खासकर तकनिकी क्षेत्र में | वहीँ भारतीय भाषाओँ में केवल धर्म और प्रांतीयता से जुड़े रहने के कारण बदलाव नहीं आ पाया | आज हमें हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओँ को तकनिकी क्षेत्र में प्रयोग करने का समय आ गाय है | उसके लिए यदि ज़रूरी है तो उनमें तबदीली लायी जाय |
  3. भारतीय भाषाओँ का प्रचार प्रसार हो – सरकारी तौर पर भारतीय भाषाओँ का प्रचार प्रसार को अधिक महत्वा दिया जाय |
  4. भारतीय भाषाएँ, खासकर हिंदी में काम करने वालों को प्रोत्साहन दिया जाय – इसके लिए हर दफ्तर, हर महकमे में मुहीम चले |
  5. हिंदी समाचार पत्र, पुस्तक एवं अन्य दस्तावेजों में तबदीली लाइ जाय और उन्हें बेहतर बनाई जाय – प्रचार प्रसार में सबसे ज़रूरी बात होती है गुणवत्ता की |
इस बारे में आप अपने ख्याल से मुझे अवगत करवाइए | पाठकों से अनुरोध है कि वो केवल सहमति या असहमति न जताकर, अपने विचार टिपण्णी के स्वरुप में लिखें |

आप को ये भी पसंद आएगा .....

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