Indranil Bhattacharjee "सैल"

दुनियादारी से ज्यादा राबता कभी न था !
जज्बात के सहारे ये ज़िन्दगी कर ली तमाम !!

अपनी टिप्पणियां और सुझाव देना न भूलिएगा, एक रचनाकार के लिए ये बहुमूल्य हैं ...

Apr 14, 2010

तुम एक दिन हो

आजकल यहाँ जुदाई का मौसम चल रहा है ! इसलिए मन उदास ! इस उदासी में कहीं किसी दरार से रिसने लगे कुछ भावों को कविता में ढाल दिया जो आपके समक्ष प्रस्तुत है ! इस कविता को समर्पित करता हूँ अपनी अर्धांगिनी को जो इस वक़्त मुझसे काफी दूर है ! कहा न ... आजकल जुदाई का मौसम चल रहा है ...

तुम एक दिन हो !
हाँ,
पूरा एक दिन !
मुझे देखते ही
तुम्हारे चेहरे पर
खिल जाती है सुबह की किरणे !
तुम्हारी बातें,
जैसे दिन भर
इस डाल से उस डाल,
इस पेड़ से उस पेड़,
चिड़ियों का फुदकना
चहचहाना !
उदासी में भी मुस्कुराती हो
तो लगता है कि,
बादलों की ओट से
चांदनी झलक रही हो !
और नाराज़ होती हो
तो रात घनेरी घिर जाती है !
मनाता हूँ,
तो बहुत मुश्किल से
फिर एक हलकी सी मुस्कान,
जैसे सुबह कि पहली किरण !
इसलिए तो कहता हूँ कि,
तुम एक दिन हो,
पूरा एक दिन !

20 comments:

  1. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    ReplyDelete
  2. खूबसूरत भावनाओं से सजी अच्छी रचना.....आशा की किरण सी

    ReplyDelete
  3. अच्छी अभिव्यक्ति है।

    ReplyDelete
  4. bahut sundar kavita..
    accha laga aapko padhna..
    aapki ek prastuti charcha manch mein aaj daali hai dekh lijiyega..
    aabhaar...
    http://charchamanch.blogspot.com/

    ReplyDelete
  5. वाह!!!!!!!!!! गहरी बात मन में भी हलचल पैदा कर गयी
    आभार

    ReplyDelete
  6. तुम एक दिन हो पूरा दिन ....
    वाह ग़ज़ब के ज़ज्बात हैं आवकी इस रचना में ... पत्नी समर्पित बहुत अच्छी रचना है ...

    ReplyDelete
  7. बहुत सुंदर प्रेम कविता... मन को छू लेने वाली कविता

    ReplyDelete
  8. पूरा एक दिन मिल जाना भाग्य की बात है।

    ReplyDelete
  9. indra bhai...achha laga aap mere blog par aaye aur apni mahattavpoorn tippani ki....

    aapki ye rachna bahut achhi lagi mujhe, aate rahiyega!

    ReplyDelete
  10. कलमकार सच्चा जहाँ भी रहेगा ।
    जो अनुभव करेगा वही सब कहेगा ॥
    बधाई!

    ReplyDelete
  11. tum ek poora din,
    meri pooree kalpana...
    kalam kee sampoorn syaahi...

    ReplyDelete
  12. bahut khoob sir ...prem me insaan kitna srijnatmak ho jata hai...

    ReplyDelete
  13. ...बहुत सुन्दर,प्रसंशनीय !!!

    ReplyDelete
  14. ओये होए ....मुबारक जी ये एक दिन ......!!

    ReplyDelete
  15. तुम एक दिन हो! वाह! बहुत खूब! मुबारक!

    ReplyDelete
  16. बहुत बहुत शुक्रिया..... इन्द्रनील.....

    फ्रेंड्स???????

    ReplyDelete
  17. i loved this poem.........ek poora din naseeb hai aapko apne har rang me ..
    thanks for dropping by and appreciating my effort.

    ReplyDelete
  18. Kya baat hai..aap ne to stabdh kar diya!

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणियां एवं सुझाव बहुमूल्य हैं ...

आप को ये भी पसंद आएगा .....

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...