Indranil Bhattacharjee "सैल"

दुनियादारी से ज्यादा राबता कभी न था !
जज्बात के सहारे ये ज़िन्दगी कर ली तमाम !!

अपनी टिप्पणियां और सुझाव देना न भूलिएगा, एक रचनाकार के लिए ये बहुमूल्य हैं ...

May 29, 2011

ग़ज़ल में अब मज़ा है क्या ?

ये चित्र मेरा अपना लिया हुआ है !

आज  फिर आप सबके लिए एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जो मैंने "मुफायलुन्  मुफायलुन्" बहर में कहने की कोशिश की है ... बताइए ज़रूर कि आपको कैसी लगी मेरी ये कोशिश ...


ये जिंदगी, पता है क्या ?
न खत्म हो, सज़ा है क्या ?

है आँख क्यूँ भरी भरी ?
किसी ने कुछ कहा है क्या ?

दिखाते हो हरेक को
ज़ख़्म अभी हरा है क्या ?

नसीब फिर जला मेरा
कि राख में रखा है क्या ?

है रंग फिर उड़ा उड़ा
मेरी खबर सुना है क्या ?

सज़ा तो मैंने काट ली
बता दे अब खता है क्या

रगड़ लो हाथ लाख तुम
 लिखा है जो मिटा है क्या ?

समझ गया पढ़े बिना
कि खत में वो लिखा है क्या

जो टूटे वो जुड़े नहीं
ज़ख़्म कभी भरा है क्या ?

खुदा है वो पता उसे
कि दिल की अब रज़ा है क्या

ज़रा सा गम मिलाया है
ग़ज़ल में अब मज़ा है क्या ?

समझ सका न “सैल” ये
अजीब सिलसिला है क्या ॥

42 comments:

  1. आपकी गज़ल तो सुन्दर है ही मगर उस से ज्यादा सुन्दर आपका चित्र लगा…………गज़ब का लिया है आपने शुरु कर दीजिये फ़ोटोग्राफ़ी

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  2. वन्दना जी, शुक्रिया ... फोटोग्राफी का तो हमेशा से ही शौक रहा है मुझे ... आजकल डिजिटल फोटोग्राफी होकर काम आसान हो गया है ... मैं अपने फेसबुक एकाउंट में अपने लिए हुए फोटो लगाते रहता हूँ ...

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  3. सच बोलने में कष्ट हो रहा है इतनी अच्छी गज़ल बहुत दिनों से नहीं पढ़ी बहुत बहुत मुबारक हो

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  4. सज़ा तो मैंने काट ली ।
    बता दे अब खता है क्या ॥

    रगड़ लो हाथ लाख तुम ।
    लिखा है जो मिटा है क्या ?
    tasweer ke pichhe ke dhundhalke gazal suna rahe hain , donon ko sun rahi hun dekhte hue

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  5. जो टूटे वो जुड़े नहीं ।
    ज़ख़्म कभी भरा है क्या ?

    खुदा है वो पता उसे ।
    कि दिल की अब रज़ा है क्या ॥

    फोटो तो बहुत अच्छा लिया है सर! साथ ही यह गज़ल पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.

    सादर

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  6. ग़ज़ल और फोटो दोनों बहुत सुन्दर लगीं| धन्यवाद|

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  7. सैल जी क्या बात है!!

    "सज़ा तो मैंने काट ली ।
    बता दे अब ख़ता है क्या ॥"

    यह तो हर दिल की बात कह दी आपने. ग़ज़लगोई का करिश्मा हो गया यह तो.....

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  8. भूषण जी, आपने इतनी बड़ी बात कह दी ...:) धन्यवाद !

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  9. ..पूरी गज़ल सुन्दर है, पर ये शेर क्या बात है! वाह!

    समझ गया पढ़े बिना ।
    कि खत में वो लिखा है क्या

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  10. रगड़ लो हाथ लाख तुम ।
    लिखा है जो मिटा है क्या ?

    बहुत ख़ूबसूरत गज़ल..हरेक शेर लाज़वाब..

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  11. बहुत अच्छे, ऐसा ही होना चाहिए, गजल के साथ जानदार चित्र,

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  12. सुंदर शब्दों के साथ बहुत सुंदर चित्र...
    अच्छी ग़ज़ल...

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  13. दिखाते हो हरेक को ।
    ज़ख़्म अभी हरा है क्या ?
    अद्भुत! मानवीय संबंधों को आपने बेहद आत्मीय शैली में सुनाया है।

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  14. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति.. काफी अच्छा लगा इस ग़ज़ल को पढना.. यूँ ही और बेशुमार गजलें देते रहे...

    सुख-दुःख के साथी पर आपके विचारों का इंतज़ार है..
    आभार

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  15. तस्वीर और गजल दोनों सुन्दर हैं.

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  16. दिखाते हो हरेक को ।
    ज़ख़्म अभी हरा है क्या ?

    नसीब फिर जला मेरा ।
    कि राख में रखा है क्या ?

    गज़ल पढ़ने में जो मज़ा आया बयान करना मुश्किल. बहुत खूबसूरत.

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  17. कमाल की अभिव्यक्ति।

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  18. नसीब फिर जला मेरा ।
    कि राख में रखा है क्या ?
    बहुत ही शानदार रचना,
    - विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  19. रगड़ लो हाथ लाख तुम ।
    लिखा है जो मिटा है क्या ?

    वाह,खूब.
    प्यारी ग़ज़ल.

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  20. समझ गया पढ़े बिना ।
    कि खत में वो लिखा है क्या ॥
    जो टूटे वो जुड़े नहीं ।
    ज़ख़्म कभी भरा है क्या ?
    वाह क्या बात है! बहुत ही सुन्दर, शानदार और ज़बरदस्त ग़ज़ल लिखा है आपने ! आपकी लेखनी को सलाम!

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  21. सज़ा तो मैंने काट ली ।
    बता दे अब खता है क्या ॥


    बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल है... हर एक शेअर दा`द के काबिल...
    प्रेमरस.कॉम

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  22. सज़ा तो मैंने काट ली ।
    बता दे अब खता है क्या ॥

    kya baat hai sail bhaiyaa...mazedaar likhe ho ekdum direct dil se..!!

    ReplyDelete
  23. सज़ा तो मैंने काट ली ।
    बता दे अब खता है क्या ॥

    लाजवाब बाकमाल शेर...भाई वाह गज़ब की ग़ज़ल कही है आपने...दाद कबूल करें
    नीरज

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  24. सज़ा तो मैंने काट ली ।
    बता दे अब खता है क्या ..

    क्या बात है सैल साहब ... लाजवाब ग़ज़ल है और ये शेर तो कतल है .... बहुत उम्दा ...

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  25. .

    सज़ा तो मैंने काट ली ।
    बता दे अब खता है क्या ॥

    Wow ....Awesome !

    Very nice creation Neel ji.

    .

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  26. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 31 - 05 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    साप्ताहिक काव्य मंच --- चर्चामंच

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  27. बेहद खूबसूरत ग़ज़ल ......

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  28. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  29. ज़रा सा गम मिलाया है ।
    ग़ज़ल में अब मज़ा है क्या ?
    wah bahut khoob!

    --devendra gautam

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  30. रगड़ लो हाथ लाख तुम ।
    लिखा है जो मिटा है क्या ?
    तस्‍वीर के साथ यह पंक्तियां
    बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  31. गज़ल के कायदों का तो नहीं मालूम लेकिन पढ़कर मजा आ गया। बहुत खूब लगी आपकी यह गज़ल।

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  32. वाह वाह हर एक शेर मुकम्मल है गहरा है और खूबसूरत है.

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  33. भावनाओं से परिपूर्ण प्रभावी रचना . आभार.

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  34. पढ़ा है जब से 'सैल' को
    बताऊँ मैं ,'पढ़ा' है क्या.
    कि ज़िन्दगी के फलसफे
    सिवा न कुछ दिखा यहाँ .
    हरेक शेर में वजन
    हरेक शेर फलसफा
    बहुत हसीन दर्द भी
    है शेर में छुपा हुआ.
    रौ भी है , रवानी भी
    ग़ज़ल पे मैं फ़िदा हुआ
    कि जब से सैल को पढ़ा
    बिना पीये नशा हुआ.

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  35. है आँख क्यूँ भरी भरी ?
    किसी ने कुछ कहा है क्या ?
    लाजवाब

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  36. वाह ....बहुत ही खूबसूरत शब्‍द ...बेहतरीन प्रस्‍तुति

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  37. bahut khub

    जिन्दगी का यूँ रंग भी बदला बदला है क्या ?

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  38. खूबसूरत शब्‍द
    http://shayaridays.blogspot.com

    ReplyDelete

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