Indranil Bhattacharjee "सैल"

दुनियादारी से ज्यादा राबता कभी न था !
जज्बात के सहारे ये ज़िन्दगी कर ली तमाम !!

अपनी टिप्पणियां और सुझाव देना न भूलिएगा, एक रचनाकार के लिए ये बहुमूल्य हैं ...

Nov 5, 2010

हिंदी फिल्मों के गाने - क्या आपको पता है इनके धुन कहाँ से आते हैं ?

आपको पता है हमारे चहेते संगीत निर्देशक कितनी तकलीफ झेलकर दुनिया के किस किस कोने से धुन चुराकर लाते हैं ताकि हम उनका लुत्फ़ उठा सकें ...
हमें इनको धन्यवाद देना चाहिए ... क्यूंकि इनके प्रयासों के बिना हम शायद ऐसी धुन न सुन पाते ...
आपको पाकिस्तानी, बंगलादेशी, पाश्चात्य संगीत या दुनिया का हर संगीत सुनाने का श्रेय (अलबत्ता चुराकर), हमारे इन भारत प्रसिद्द संगीतकारों को जाता है ...
मैंने अपने ब्लॉग "Copycats" में ऐसे ही बेहतरीन और मौलिक संगीतकारों को सामने लाने की कोशिश की है ...
उम्मीद है आप मेरी इस "मौलिक" कोशिश को सराहेंगे ....
आप सबका मेरे इस ब्लॉग में स्वागत है ...

16 comments:

  1. दीपावली की असीम-अनन्त शुभकामनायें.

    ReplyDelete
  2. आपकी यह कोशिश प्रशंसनीय है. इसे जारी रखें. हमें मौलिक गाने सुनने को मिलेंगे.

    ReplyDelete
  3. चिरागों से चिरागों में रोशनी भर दो,
    हरेक के जीवन में हंसी-ख़ुशी भर दो।
    अबके दीवाली पर हो रौशन जहां सारा
    प्रेम-सद्भाव से सबकी ज़िन्दगी भर दो॥
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!
    सादर,
    मनोज कुमार

    ReplyDelete
  4. देखते हैं अभी जा कर.

    सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
    दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
    खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
    दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

    -समीर लाल 'समीर'

    ReplyDelete
  5. Bhushan jee,
    Thank you for the encouragement and the information that you provided in my Blog "Copycats"

    ReplyDelete
  6. अच्छा प्रयास। देखते हैं वहाँ जा कर। धन्यवाद।

    ReplyDelete
  7. सैल साहब, आपकी मेहनत की तारीफ़ करते हैं हम। सिर्फ़ गाने ही क्यों, सीन दर सीन चुरा लिये जाते हैं।
    संगीत की वैसे तो कोई भाषा नहीं होती और अगर मुझे कोई कर्णप्रिय धुन सुनने को मिल रही है, वो भी अपनी भाषा में, तो मैं तो ऐसे काम की तारीफ़ ही करूँगा। अब भाषा, तकनीक, साधन वगैरह के मामले में हर कोई इतना खुशकिस्मत नहीं होता कि मूल रचना तक पहुंच सके। हाँ,सन्दर्भ जरूर देना चाहिये और रायल्टी वगैरह कुछ बनती हो तो वो भी चुकानी चाहिये, आखिर ओ ये लोग प्रोफ़ैशनल्स ही हैं।
    फ़िर भी, आपके ब्लॉग के माध्यम से मूल रचना के बारे में जानकर अच्छा लगा। धन्यवाद।

    ReplyDelete
  8. @ मो सम कौन
    आपकी बात से सहमत हूँ कि अच्छे धुन सुनने को मिलता है ... पर क्यूँ न हम मूल रचना ही सुने ... चुराया हुआ माल खाना क्या अच्छी बात है ?
    हमारे संगीतकार धुन तो उठाते ही हैं, पर नमकहरामी भी करते हैं ... मूल रचनाकार की बात बताना भूल जाते हैं ...

    ReplyDelete
  9. आपकी यह बात कि "भाषा, तकनीक, साधन वगैरह के मामले में हर कोई इतना खुशकिस्मत नहीं होता कि मूल रचना तक पहुंच सके" कुछ हद तक सही है ... पर पूरी तरह नहीं ...
    ज्यादातर लोग जो आसानी से मूल रचना का आनंद ले सकते हैं, वो इस बारे में सोचते ही नहीं है ... दरअसल हमारे देश में कापीराईट का कोई महत्व कभी नहीं था न है ... इस बात को मैं बहुत ही गलत मानता हूँ ... हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है कि हमारे संगीतकार चुराए हुए धुन सुना रहे हैं ...
    उन्हें कोई मेहनत नहीं करनी पड़ती है और फिल्म हिट ...
    ज़रा सोचिये क्या ये सही तरीका है ....
    अगर हर कोई इस तरह सोचे तो शायद बहुत ही कम समय में भारतीय संगीत का महान परंपरा खतम हो जायेगा ... हर कोई हर वक्त बस चोरी का संगीत ही सुनेगा ... अच्छा संगीत का रचना कभी होगा ही नहीं

    ReplyDelete
  10. क्यूँ न हम मूल रचना ही सुने ... चुराया हुआ माल खाना क्या अच्छी बात है ?

    वैसे हमारे यहाँ कहते हैं कि चोरी का गुड खाने में कुछ ज्यादा ही मीठा लगता है :)

    ReplyDelete
  11. सैल जी, चोरी को जायज न ठहरा कर मैं भी यही चाह रहा हूँ कि मूल रचना व रचनाकार को उनका देय सम्मान व रायल्टी देकर ही दूसरी भाषा के लोगों तक उपलब्ध करवाना चाहिये।
    संगीत, साहित्य किसी एक प्रांत, भाषा की संपत्ति न होकर समस्त मानवता के लिये तोहफ़ा हैं, प्रचार प्रसार होना ही चाहिये, लेकिन जायज तरीके से ही।

    ReplyDelete
  12. आपकी यह कोशिश प्रशंसनीय है.
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  13. आप अपने प्रयास जारी रखें सचाई हमेशा सामने आनी चाहिए ...शुभकामनायें

    ReplyDelete
  14. Koshish bahut achhi hai.... main pahale yahan ja chuki hun....

    ReplyDelete
  15. सैल जी, अब क्या कहूं इस पर लोग चुराते है और शान से अपना बताते हैं!लेकिन आप की Research यकीन गहरी है! पर चोरों को शर्म आये मुमकिन नही!

    ReplyDelete
  16. चोरों को शर्म आये ये मेरा उद्देश्य भी नहीं ...
    मैं आम जनता के मन में मौलिक कृति और बेहतरीन मौसिकी के बारे में जागरूकता पैदा करना चाहता हूँ ...
    यदि मेरे इस ब्लॉग से एक भी इंसान में जागरूकता पैदा हो तो इसे मैं सार्थक समझूंगा ...

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणियां एवं सुझाव बहुमूल्य हैं ...

आप को ये भी पसंद आएगा .....

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...