Indranil Bhattacharjee "सैल"

दुनियादारी से ज्यादा राबता कभी न था !
जज्बात के सहारे ये ज़िन्दगी कर ली तमाम !!

अपनी टिप्पणियां और सुझाव देना न भूलिएगा, एक रचनाकार के लिए ये बहुमूल्य हैं ...

Dec 4, 2010

राम को राज दिलाकर देखो


कैकयी को समझाकर देखो
राम को राज दिलाकर देखो
फासले बीच के मिट जायेंगे
हाथ से हाथ मिलाकर देखो
छोड़के बात समझदारी की
जोश में होश गवांकर देखो
खेल में और मज़ा आएगा
हार या जीत भुलाकर देखो
प्रीत की आग धधक उठेगी
दर्प की राख उड़ाकर देखो
“सैल” समाज सुधर जायेगा
जात औ पात हटाकर देखो

55 comments:

  1. बहुत ही अच्छी रचना है.

    'प्रीत की आग धधक उठेगी
    दर्प की राख उड़ाकर देखो'

    वाह..वाह..वाह...

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  2. सैल जी, आपका यह टेम्‍पलेट बहुत प्‍यारा है। और हॉं, कविता के भाव भी दिल को छूने वाले हैं।


    ---------
    ईश्‍वर ने दुनिया कैसे बनाई?
    उन्‍होंने मुझे तंत्र-मंत्र के द्वारा हज़ार बार मारा।

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  3. @ भूषण जी, दीदी और ज़ाकिर जी,
    आप सभीको धन्यवाद !

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  4. वाह!!!वाह!!! क्या कहने, बेहद उम्दा

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  5. Kai dino baad kuchh optimistic padhne ko milaa... behad pasand bhi aaya :)

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  6. बहुत ही पसन्द आयी ये रचना……………गज़ब की प्रस्तुति। हर पंक्ति लाजवाब्।

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  7. @ संजय भास्कर जी, मोनाली जी और वंदना जी

    आप सबको अनेक धन्यवाद कि आपने रचना को पसंद किया ..

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  8. बहुत सुन्दर.... वाह

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  9. .

    @-प्रीत की आग धधक उठेगी ।
    दर्प की राख उड़ाकर देखो ॥

    ....

    इन्द्रनील जी,
    आपने तो जिंदगी जीने का सरल और सुन्दर तरीका बता दिया इस रचना द्वारा।
    आभार।

    .

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  10. हर शे’र पर मुंह से वाह-वाह निमलती रही। बेहतरीन। लाजवाब।

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  11. प्रीत की आग धधक उठेगी ।
    दर्प की राख उड़ाकर देखो ॥
    “सैल” समाज सुधर जायेगा ।
    जात औ पात हटाकर देखो ॥
    Kya gazab kaa likha hai...pooree rachana hee lajawaab hai!

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  12. “सैल” समाज सुधर जायेगा
    जात औ पात हटाकर देखो

    प्यारा सन्देश.काश लोग ये समझ जाते

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  13. बढ़िया समझाइश ...... पर कोई माने तब ना !

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  14. “सैल” समाज सुधर जायेगा ।
    जात औ पात हटाकर देखो


    ये कविता समाज को एक सुंदर सन्देश देती है ....

    समाज सुधर जाएगा ????

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  15. प्रीत की आग धधक उठेगी ।
    दर्प की राख उड़ाकर देखो ॥
    ‘सैल‘ समाज सुधर जायेगा ।
    जात औ पात हटाकर देखो ॥

    प्रेरणा देती हुई बहुत बेहतरीन ग़ज़ल सैल जी।

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  16. “सैल” समाज सुधर जायेगा ।
    जात औ पात हटाकर देखो ॥

    बेहतरीन भाव और एक सार्थक सन्देश देने वाली पंक्तियाँ.

    सादर

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  17. कैकयी को समझाकर देखो ।
    राम को राज दिलाकर देखो ॥
    फासले बीच के मिट जायेंगे ।
    हाथ से हाथ मिलाकर देखो ॥

    sail ji. bahoot hi sunder jajbat. kash aisa hi hota.

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  18. बहुत ही अच्छी रचना है............

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  19. “सैल” समाज सुधर जायेगा ।
    जात औ पात हटाकर देखो

    बहुत सुन्दर....

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  20. खूबसूरत भाव ..बहुत सुन्दर.

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  21. बडे पते की बात कही है।

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  22. गज़ब बात कही है सैल साहब, बहुत अच्छे।

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  23. @ दीपक दुदेजा जी
    बिलकुल सुधरेगा जी, लोग जात-पात जैसी कुरीतियाँ हटाकर तो देखे ...
    न सुधरे तो कहियेगा ...

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  24. @ महफूज़ अली जी
    बहुत दिनों बाद आप मेरे ब्लॉग पर आये ... और मुझे पता है कि वो भी रचना का शीर्षक देखकर ..."राम को राज दिलाकर देखो" ...
    यहाँ मैं इस शेर का मतलब बताना ज़रूरी समझता हूँ ....
    ये शेर कोई हिंदू-मुस्लिम मसले पर नहीं लिखा गया है ...
    उस ज़माने में बड़े लड़के को राज्य दिया जाता था, यही नियम था और फिर राम तो हर मायने में इस पड़ के योग्य थे ... पर कैकयी के जिद्द के कारण उनको उनका हक नहीं मिला ... यह वाकया एक प्रतीक है हमेशा से जो होता आया है और आज भी समाज में यत्र-तत्र हो रहा है, उसका ... यानि कि जहाँ भी किसीका हक मारा जाता है ... यही वाकया दोहराया जाता है ...
    जिस तरह राजा दशरथ कैकयी को समझा नहीं पाए थे ... उसी तरह आज भी हम उन लोगों को नहीं समझा पाते हैं जो लोग दूसरों के हक मारते हैं ... आरक्षण के नाम पे, जात-पात के नाम पे, धर्म के नाम पे, भाई-भतीजावाद के नाम पे ..... इत्यादि इत्यादि ..

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  25. अरे वाह इन्द्रनील जी...थोड़ी देर हो गयी आने में माफ़ी चाहूँगा...
    वैसे आपके मिजाज काफी बदले बदले से हैं इस रचना में...बहुत ही सुन्दर....


    पहचान कौन चित्र पहेली ...

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  26. पहली बार आपके विचारों से अवगत हुआ, अच्छा लगा, अच्छी प्रस्तुति के लिए आपका आभार.

    आपके अपने ब्लॉग पर स्वागत है,
    http://arvindjangid.blogspot.com/

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  27. बात बढ़ानी छोड़ दो प्यारे
    अब तो हाथ बढ़ा के देखो

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  28. Sahmat hun..Sahmat hun....100 % sahmat hun.

    Ek Umda sandesh deti aapki ye rachna dil men utar gai. Iske ke liye apko hardhik abhar.

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  29. @ मौदगिल जी
    क्या बात है, आप तो शेर पे सवा शेर मार दिए !

    @ अरविन्द जी
    आपका स्वागत है !

    @ शेखर सुमन जी,
    बदलाव तो जिंदगी का नियम है ...:)

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  30. सुंदर संदेश देती बेहतरीन अभिव्यक्ति के लिए आभार

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  31. “सैल” समाज सुधर जायेगा
    जात औ पात हटाकर देखो ...

    गज़ब का सन्देश दिया है सैल जी ... समाज का स्वरुप खींच दिया है इस ग़ज़ल में आपने ....

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  32. @ ललित जी,
    देर आये दुरुस्त आये ... धन्यवाद !

    नासवा जी, आपको बहुत बहुत शुक्रिया सराहने के लिए !

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  33. बहुत अच्छा सन्देश देती सुन्दर रचना ...

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  34. सार्थक सन्देश देती रचना!
    सादर!

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  35. "प्रीत की आग धधक उठेगी ।
    दर्प की राख उड़ाकर देखो ॥
    “सैल” समाज सुधर जायेगा ।
    जात औ पात हटाकर देखो ॥"

    एक अच्छा सन्देश देती कविता

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  36. बहुत ही सार्थक और समय के अनुकूल रचना

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  37. फासले बीच के मिट जायेंगे ।
    हाथ से हाथ मिलाकर देखो ॥
    बहुत सार्थक सन्देश ...आपका आभार

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  38. बहुत ख़ूबसूरत और लाजवाब रचना ! आपकी लेखनी को सलाम!

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  39. प्रीत की आग धधक उठेगी ।
    दर्प की राख उड़ाकर देखो ॥
    दर्प ही तो है जो जिन्दगी को स्वाभाविक गति से गमन नहीं करने देती
    सुन्दर सन्देश देती रचना

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  40. बहुत बेहतरीन!

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  41. बहुत ही सुन्‍दर भावमय प्रस्‍तुति ....।

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  42. प्रीत की आग धधक उठेगी ।
    दर्प की राख उड़ाकर देखो ॥
    “सैल” समाज सुधर जायेगा ।
    जात औ पात हटाकर देखो ॥
    बहुत सुन्दर गज़ल है और ये दोनो शेर तो बहुत ही अच्छे लगे। शुभकामनायें।

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  43. hmmm, is smile ke peeche kahaani ye hai sir, ke main 3 dis se yahan comment karne ki koshish kar rahi hoon, aur har baar vo publish ni hota, on the contrary main hi net se bump off ho jaati hoon, aaj 4th time try karne ka baad jab nahin hua, to phir himmat juta kar 5th time koshish ki, sirf is smiley ke saath, to lo, ho gaya...
    long story short, amazing post, pichle comments mein dhand se likha tha response, now i dont hav patience anymore...
    hoping this goes thru...jai mata di ;)

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  44. oh my god...ho gaya...!!!! lucky day !
    ;)

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  45. @ saanjh
    आपको अनेक धन्यवाद कि आप टिप्पणी देने के लिए इतनी मेहनत किये !
    आपकी टिप्पणी मेरे लिए अब और महत्वपूर्ण हो गया है ...

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  46. waah shail ji..maja aa gaya...:)
    jaat paat mita ke dekho..antim waali pankti to bas kamaal ki hai :)

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  47. bahut hi prabhav shali avamek bahut hi mahtv purn sandesh deti aapki yah rachna waqai kabile taarrif hai .kitne aasaani seaapne aapne jajbaato ko saral shabdo me piro kar rakh diya.
    bahit bahut badhai
    poonam

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  48. “सैल” समाज सुधर जायेगा ।
    जात औ पात हटाकर देखो ॥
    beautiful

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