Indranil Bhattacharjee "सैल"

दुनियादारी से ज्यादा राबता कभी न था !
जज्बात के सहारे ये ज़िन्दगी कर ली तमाम !!

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Feb 12, 2017

अनमनी सी खुशबू

बहुत दिनों से कुछ भी लिखा नहीं था। कल नींद नहीं आ रही थी तो जेहन में कुछ पंक्तियाँ यूँ ही उभर आईं । रात को उठकर कुछ लिखने की हिम्मत नहीं थी। सो सुबह उठकर सबसे पहले उन्हें लिख डाला कि कहीं भूल न जाऊं।

यादों के लिफाफे से झांकते 
कुछ सूखे बेरंग लम्हे,
टूटकर बिखरती पंखुड़ियां;
पीले पड़ चुके कागज़ को
बहुत संभलकर खोलना,
और उन परतों में लिपटी
कुछ पलों को आँख भरकर
एक एक करके चुनना;
फिर सहेजके रख देना,
कि ऐसे ही फिर से किसी दिन,
यूँ ही किसी
अनमनी सी खुशबू
के बुलावे पर
खो जायेंगे।

9 comments:

  1. सुंदर स्वप्निल रचना।

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    1. धन्यवाद सुब्रमनियन जी

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  2. आज की ब्लॉग बुलेटिन जन्मदिन भी और एक सीख भी... ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद आप सबको..... ब्लॉग बुलेटिन को मेरा आभार

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  3. Khub sundor hoyeche Dada...keep writing more

    ReplyDelete
  4. Khub sundor hoyeche Dada...keep writing more

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