Indranil Bhattacharjee "सैल"

दुनियादारी से ज्यादा राबता कभी न था !
जज्बात के सहारे ये ज़िन्दगी कर ली तमाम !!

अपनी टिप्पणियां और सुझाव देना न भूलिएगा, एक रचनाकार के लिए ये बहुमूल्य हैं ...

Feb 18, 2011

क्या करें !

हर पल यही उलझन है कि क्या करें .... फिरते रहे जिंदगीभर यूँ ही उलझनों की अंधी गलियों में ... पर कुछ उलझन ऐसी भी होती हैं जो खूबसूरत होती हैं ... और कभी जी करता है कि फिर ये उलझन कभी न सुलझे ...

क्या करें उनसे शिकायत, क्या करें
जो है कातिल, वो अदालत, क्या करें
हमने पूछा चाहिए क्या ये बता
मांग ली उसने मुहब्बत, क्या करें
राह तकते हो गए आखिर फना 
आ गया रोज़े क़यामत, क्या करें
है बड़ी कातिल अदा, उनकी कसम
मार डालेगी शरारत, क्या करें
वो सदा में सर्द मेहरी, क्या कहूँ
उफ़ नज़र की ये हरारत, क्या करें
ज़ख्म सारे ज़र्द दिल में हैं रखे 
जैसे हुज्जते इनायत, क्या करें
सैल मैंने देखकर बेहिस् जहां
छोड़ दी है अब शराफत, क्या करें

तस्वीर मेरी अपनी ली हुई है ...

45 comments:

  1. बहुत बढिया रचना।

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  2. इतनी उम्दा गजल पर टिप्पणी क्या करें ...बस पढ़ते रहें

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  3. राह तकते हो गए आखिर फना ।
    आ गया रोज़े क़यामत, क्या करें ॥


    अगर ये बात समझ में आ जाये, केवल शब्‍द और मनोरंजन ही ना हो, तो वास्‍तवि‍क क्रांति‍ की संभावना बनती है। लेकि‍न अगर आप कमेंट पाने के लि‍ये तुकें मि‍ला रहे हैं तो वास्‍तव में रोजे कयामत तक, फना हो जाने तक यही हाल रहने वाला है। तुके मि‍लाने वाले और कमेंट करने वाले सब____ व्‍यर्थ ही फना हो जाने वाले हैं। तो अगर मौका हैं, सेहत है सांसे हैं .... तो
    वो क्‍या है
    जि‍सके लि‍ये सब मर मि‍टते हैं,
    जो सबको अजीज रहती है, पता करें
    मौत से बेअसर क्‍या चीज रहती है पता करें

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  4. क्या करें उनसे शिकायत, क्या करें ।
    जो है कातिल, वो अदालत, क्या करें ॥
    हमने पूछा चाहिए क्या ये बता ।
    मांग ली उसने मुहब्बत, क्या करें ॥
    राह तकते हो गए आखिर फना ।
    आ गया रोज़े क़यामत, क्या करें ॥
    Kya gazab dhaya hai!
    Tasveer bhee bahut sundar! Wah!

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  5. राह तकते हो गए आखिर फना ।
    आ गया रोज़े क़यामत, क्या करें ... kya baat hai , bahut hi badhiyaa

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  6. ‘सैल’ मैंने देखकर बेहिस् जहां ।
    छोड़ दी है अब शराफत, क्या करें ॥

    बेहतरीन!!!

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  7. bahut sunder gajal hai.
    mere blog par ane ke liye bahut aabhar.....

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  8. हमने पूछा चाहिए क्या ये बता ।
    मांग ली उसने मुहब्बत, क्या करें ॥
    राह तकते हो गए आखिर फना ।
    आ गया रोज़े क़यामत, क्या करें ॥

    बहुत ही खूबसूरत शब्‍दों का संगम है इस रचना में ।

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  9. है बड़ी कातिल अदा, उनकी कसम ।
    मार डालेगी शरारत, क्या करें !

    आनंद आ गया ....
    शुभकामनायें !

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  10. एक पुराना गाना था ’शरीफ़ों का जमाने में वो देखा हाल, शराफ़त छोड़ दी मैंने’ आप बेहिस जहां को देखकर शराफ़त छोड़ने की बात कह गये।
    तारीफ़ के सिवा हम, क्या कहें?
    बहुत अच्छा लिखते हैं आप, चाहे गज़ल हो या सामाजिक विषय पर कोई लेख। आभार।

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  11. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (19.02.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  12. हमने पूछा चाहिए क्या ये बता ।
    मांग ली उसने मुहब्बत, क्या करें ||

    बहुत प्यारा शेर है,वाह वाह.

    मैं तो यही कह सकता हूँ कि:-
    माँगा भी तो ऐ जालिम क्या मांग लिया तूने,
    वल्लाह मुझे अपना दीवाना किया तूने

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  13. रहस्यमय दार्शनिक अंदाज में बात कही है.

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  14. हमने पूछा चाहिए क्या ये बता ।
    मांग ली उसने मुहब्बत, क्या करें ॥

    वाह क्या बात है. बहुत उम्दा ग़ज़ल है. सैल जा आपको बधाई. सभी अशआर सुंदर बन पड़े हैं.

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  15. अच्छी ग़ज़ल है इन्द्रनील जी. बधाई.

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  16. है बड़ी कातिल अदा, उनकी कसम ।
    मार डालेगी शरारत, क्या करें ॥
    Bahut khoob!Shararati panktiyan!

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  17. सैल’ मैंने देखकर बेहिस् जहां ।
    छोड़ दी है अब शराफत, क्या करें ॥

    बहुत उम्दा ग़ज़ल -
    बधाई

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  18. बढ़िया है ,बधाई हो ,क्या कहें

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  19. खुबसुरत गजल। बेहतरीन शेर। अब हम भी इससे ज्यादा क्या कहें।

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  20. अच्छा लगा पढ़कर .... बेहतरीन ग़ज़ल ...

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  21. गज़ल पढ़ते समय शब्दों पर सर्फिंग का मज़ा मिला.

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  22. अच्छी ग़ज़ल है इन्द्रनील जी. बधाई.

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  23. बहुत ही खूबसूरत शब्‍दों का संगम है इस रचना में| बधाई|

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  24. इस ग़ज़ल में गेयता है।
    बार-बार पढ़ने को मन करता है।
    शुभकामनाएं।

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  25. क्या करें उनसे शिकायत, क्या करें ।
    जो है कातिल, वो अदालत, क्या करें ॥
    हमने पूछा चाहिए क्या ये बता ।
    मांग ली उसने मुहब्बत, क्या करें ॥
    राह तकते हो गए आखिर फना ।
    आ गया रोज़े क़यामत, क्या करें ॥
    mood ko badal dene wali rachna ,laazwaab .

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  26. है बड़ी कातिल अदा, उनकी कसम
    मार डालेगी शरारत, क्या करें ..

    बहुत खूब ... नटखट है आपका ये शेर ,...... पूरी ग़ज़ल के क्या कहने .. सुभान अल्ला ...

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  27. राह तकते हो गए आखिर फना ।
    आ गया रोज़े क़यामत, क्या करें ॥

    बहुत सुन्दर!

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  28. उम्दा ग़ज़ल.
    हमने पूछा चाहिए क्या ये बता ।
    मांग ली उसने मुहब्बत, क्या करें ॥

    तारीफ़ न करें ,तो क्या करें..
    सलाम

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  29. इस गजल के लिये यही कह सकता हूँ । वाह इन्द्रनील जी..कमाल ।

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  30. नमस्कार इन्द्रनील जी । उत्तर देने में थोङा विलम्ब हो गया । आप कृपया अपनी ब्लाग तालिका में एडिट द्वारा Thumbnail of most recent item पर भी "सही का निशान" लगाकर सेव कर लें । और आइकन वाला बाक्स से हटा दें । तो भी स्थान इतना ही घेरेगा । लेकिन सुन्दरता बङ जायेगी । आपकी मेल आई डी मेरे पास नहीं है । वरना मेल से आपको कोड भेज देता ।

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  31. राह तकते हो गए आखिर फना ।
    आ गया रोज़े क़यामत, क्या करें ॥
    मन की कशमकश को सुन्दर शब्दों मे सजाया है। बहुत खूब। शुभकामनायें

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  32. ये ग़ज़ल पढ़ने के बाद कमेन्ट
    करना है तो बता,क्या करें...
    बहुत सुन्दर...

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  33. वाह! कमाल का कलाम! वाह!

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  34. राह तकते हो गए आखिर फना ।
    आ गया रोज़े क़यामत, क्या करें

    बहुत उम्दा...

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  35. शायद आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार के चर्चा मंच पर भी हो!
    सूचनार्थ

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  36. धन्यवाद शास्त्रीजी !

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